पांडवेश्वर: सनातन धर्म की संस्कृति, परंपरा और मूल्यों के पुनर्जागरण के उद्देश्य से पांडवेश्वर के पंचपांडव मंदिर परिसर में ‘सनातनी प्रत्यावर्तन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हिंदू जागरण, मध्य बंगाल (आसनसोल जिला) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिय कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने दावा किया कि विभिन्न कारणों से अतीत में हिंदू धर्म छोड़ चुके लगभग 100 लोगों ने पुनः सनातन धर्म में वापसी की। वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें गंगाजल ग्रहण कराया गया तथा सनातन परंपराओं और पूजा-पद्धति से दोबारा जुड़ने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित संतों और धार्मिक नेताओं ने सनातन धर्म की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक एकता के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समृद्ध और व्यापक पद्धति है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।
कार्यक्रम में श्रीमৎ निर्गुणानंद ब्रह्मचारी (प्रांत अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद), श्रीमৎ जगदातिहा दास (संयुक्त सचिव, श्री सारस्वत गौड़ीय वैष्णव संघ, मायापुर), स्वामी सत्यानंद (अध्यक्ष, गीताभवन बीरभूम), संजय शास्त्री महाराज (हिंदू जागरण मंच, दक्षिण बंगाल), अमित सरकार (प्रांत संयोजक, हिंदू जागरण, मध्य बंगाल) तथा दया चांद प्रभु (इस्कॉन, आसनसोल) सहित कई धार्मिक और सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं।वक्ताओं ने समाज के सभी वर्गों से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में हिंदू जागरण, मध्य बंगाल के कार्यकारिणी सदस्य तपस सिंह ने कहा कि समाज में सनातनी चेतना के प्रसार और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के लिए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

