भारतीय सेना(Indian Army) ने सदियों पुराने औपनिवेशिक कायदे-कानूनों की कड़ियों को एक झटके में तोड़ते हुए आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026 के नाम से एक ऐसा सख्त और ऐतिहासिक रूलबुक जारी की है जिसने सैन्य गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. अब न तो परेड ग्राउंड पर निरीक्षण के दौरान अफसरों के हाथों में वो ब्रिटिश काल की तलवारें चमकेंगी और न ही सेना की डिक्शनरी में रॉयल जैसा कोई गुलामी का शब्द जिंदा रहेगा. मूंछों की कतरन से लेकर महिला अफसरों की लिपस्टिक और बिंदी तक पर सेना ने कड़े पहरे बिठा दिए हैं. गुलामी के प्रतीकों को मटियामेट कर भारतीय सेना अब पूरी तरह से देसी और स्वदेशी तेवर में सजने के लिए तैयार है, जहां बंदगला की जगह पारंपरिक बंदी जैकेट देश के गौरव को नई ऊंचाई देगी.
सेना द्वारा जारी किए गए नए 174 पन्नों के मैनुअल आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026 के तहत ब्रिटिश काल के कई नियमों, प्रतीकों और शब्दावलियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशस्त्र बलों से औपनिवेशिक तौर-तरीकों को हटाने और भारतीय सैन्य लोकाचार को अपनाने के आह्वान के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है. नए नियमों में सेना की वर्दी को आधुनिक भारतीय पहचान के अनुरूप ढाला गया है.
सेना ड्रेस कोर्ड से जुड़ी मुख्य बातें
1. बंदी जैकेट को मंजूरी: अब सेना के अधिकारी औपचारिक कार्यक्रमों में बंदगला के साथ भारतीय पारंपरिक ‘बंदी जैकेट’ भी पहन सकेंगे.
2. तलवार की अनिवार्यता खत्म: परेड के दौरान निरीक्षण करने वाले अधिकारियों (Reviewing Officers) के लिए अब तलवार ले जाना अनिवार्य नहीं होगा.
3. शब्दावली से ‘रॉयल’ शब्द बाहर: ब्रिटिश हुकूमत की याद दिलाने वाले ‘रॉयल’ जैसे कई पुराने और औपनिवेशिक शब्दों को सेना की डिक्शनरी से हटा दिया गया है.
4. महिला अफसरों के लिए सख्त नियम: यूनिफॉर्म में लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज़ पिन लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. स्लीवलेस कुर्ता या प्लाजो पैंट की अनुमति नहीं है.
5. परफ्यूम और ब्रेसलेट पर प्रतिबंध: ड्यूटी के दौरान परफ्यूम या डियोड्रेंट लगाने और ब्रेसलेट पहनने पर पाबंदी रहेगी. केवल धार्मिक उत्सव के दिन एक पवित्र धागा (मौली) पहनने की छूट होगी.
भारतीय सेना का यह कदम केवल कपड़ों का बदलाव नहीं है बल्कि यह मानसिक रूप से औपनिवेशिक दासता से मुक्त होने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक और वैचारिक कदम है. दुनिया की सबसे अनुशासित सेनाओं में शुमार भारतीय सेना अब अपनी स्वदेशी पहचान को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित कर रही है. बंदी जैकेट को शामिल करना और रॉयल जैसे शब्दों को हटाना यह दिखाता है कि भारत अब अपनी सैन्य पहचान को भारतीय मूल्यों के आधार पर परिभाषित कर रहा है. इसके साथ ही, ग्रूमिंग और कॉस्मेटिक्स पर सख्त नियम लागू करके सेना ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिकता के दौर में भी सैन्य अनुशासन, सादगी और एकरूपता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

