शादी से पहले शारीरिक संबंध पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, आखिर क्यों बताया इसे आम बात, क्या है वजह

शादी से पहले शारीरिक संबंध पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, आखिर क्यों बताया इसे आम बात, क्या है वजह

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि दो अविवाहित बालिगों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध को किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर सवाल उठाने का आधार नहीं बनाया जा सकता। बेंच ने यह फैसला उस मामले में सुनाया, जिसमें तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड ने एक उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द कर दी थी। यह कार्रवाई एक पुराने आपराधिक मामले के आधार पर की गई थी, जो एक असफल प्रेम संबंध से जुड़ा था।

हर रिश्ता शादी में ही बदले यह जरूरी नहीं होता

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए किसी संबंध को गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि वह विवाह तक नहीं पहुंच पाया। अदालत ने कहा कि हर रिश्ता शादी में ही बदले, यह जरूरी नहीं होता और इससे किसी एक पक्ष को धोखेबाज नहीं माना जा सकता। ऐसा कोई कानून नहीं है जो दो अविवाहित वयस्कों को सहमति से अपनी पसंद का संबंध रखने से रोकता हो।

सिर्फ इसलिए कि रिश्ता शादी में तब्दील नहीं हुआ, यह मानने का कोई आधार नहीं है कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता और पीड़िता पड़ोसी थे। चार साल तक उनके बीच संबंध थे। जब तक किसी आरोप को साबित नहीं किया जाता, तब तक व्यक्ति को निर्दोष माना जाएगा।

विवाहपूर्व संबंधों के मुद्दे पर, सर्वोच्च न्यायालय ने की विशेष टिप्पणी

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि शादी का वादा करके दुष्कर्म के मामले में लोक अदालत में समझौता करने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी ने अपना अपराध मान लिया है। कोर्ट ने कहा कि कोई एम्प्लॉयर सिर्फ इसलिए कोई बुरा नतीजा नहीं निकाल सकता कि कोई क्रिमिनल केस समझौते के साथ खत्म हुआ है, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि शिकायत करने वाले पर समझौता करने के लिए दबाव डाला गया था।

विवाहपूर्व संबंधों के मुद्दे पर, सर्वोच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसे संबंध तेजी से आम होते जा रहे हैं और जहां दो वयस्कों के बीच संबंध काफी समय तक चलता है, वहां वैध सहमति की धारणा होती है। अदालत ने गौर किया कि उम्मीदवार और शिकायतकर्ता पड़ोसी थे और कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे। न्यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे समझौता कराने के लिए बल प्रयोग, धमकी या दबाव का संकेत मिले।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *