देश के प्रतिष्ठित टेक्निकल संस्थानों में से एक, IIT (ISM) धनबाद ने 2026-27 एकेडमिक सेशन के लिए अपनी सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है। इस साल कुल सीटों की संख्या में थोड़ी कमी आई है; पिछले साल 1,210 सीटें थीं, जो अब घटकर 1,176 हो गई हैं। हालांकि, कुछ लोकप्रिय ब्रांच में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे इंजीनियरिंग करने के इच्छुक छात्रों को कुछ राहत मिल सकती है।
कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बढ़ोतरी
इस साल कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (EE) में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। CSE में सीटें पिछले साल के 139 से बढ़कर 145 हो गई हैं, जबकि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में सीटें 123 से बढ़कर 130 हो गई हैं।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ECE) में सीटों की संख्या बढ़ाकर 130 कर दी गई है। मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग में भी काफी बढ़ोतरी हुई है, जहां सीटों की संख्या 55 से बढ़कर 75 हो गई है।
पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में सबसे बड़ी कटौती
इस साल सबसे बड़ा बदलाव पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में देखा गया है। पिछले साल इस ब्रांच में 90 सीटें थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर 79 हो गई है। साथ ही, माइनिंग मशीनरी इंजीनियरिंग की सीटें 56 से घटकर 47 हो गई हैं, और मिनरल एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की सीटें 45 से घटकर 37 हो गई हैं।
अन्य ब्रांच में बदलाव
मैकेनिकल इंजीनियरिंग में सीटों की संख्या 131 से घटकर 130 हो गई है, जबकि सिविल इंजीनियरिंग में एक सीट बढ़ी है, जिससे कुल सीटें 70 हो गई हैं। एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग और इंजीनियरिंग फिजिक्स जैसी ब्रांच में भी सीटों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
IIT (ISM) धनबाद में एडमिशन प्रोसेस
IIT (ISM) धनबाद में एडमिशन पाने के लिए, छात्रों को सबसे पहले JEE एडवांस्ड परीक्षा पास करनी होगी। इसके बाद, सफल उम्मीदवारों को JoSAA (जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी) काउंसलिंग प्रोसेस में शामिल होना होगा। सीट का आवंटन उम्मीदवारों की ऑल इंडिया रैंक, कैटेगरी और पसंद के आधार पर तय किया जाता है। देश भर के सभी IIT, NIT, IIIT और अन्य प्रमुख सरकारी टेक्निकल संस्थानों के लिए एडमिशन प्रोसेस JoSAA काउंसलिंग के जरिए होता है। इसलिए, IIT (ISM) धनबाद में एडमिशन लेने के इच्छुक छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे काउंसलिंग के दौरान अपनी पसंद भरते समय सावधानी बरतें और अपनी रैंक व पसंदीदा ब्रांच का ध्यान रखें।
जानकारों का मानना है कि CSE, ECE और मैथमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग जैसी ब्रांच में सीटें बढ़ने से छात्रों को ज़्यादा मौके मिलेंगे, क्योंकि टेक्निकल और डिजिटल सेक्टर में इनकी मांग बढ़ रही है। वहीं, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग और कुछ पारंपरिक ब्रांच में सीटों की संख्या कम होना संस्थान की बदलती एकेडमिक और इंडस्ट्रियल प्राथमिकताओं को दिखाता है।

