बिहार(BIHAR): एक गजल है -हुई महंगी बहुत ही शराब की थोड़ी -थोड़ी पिया करो,,,पिछले कुछ समय से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और अभी केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी भी यही बात कह रहे हैं। यह कहनेवाले वे अकेले नेता नहीं हैं। कई अन्य नेता भी बिहार के शराबबंदी कानून में बदलाव चाहते हैं।
शराबबंदी का विरोध करनेवालों में जीतनराम मांझी सबसे मुखर हैं। वे लगातार शराबबंदी का गुजरात मॉडल लागू करने की मांग करते रहे हैं। उन्होंने बार बार यह कहा कि आईएएस, आईपीएस,इंजीनियर, डॉक्टर, प्रोफेसर और जजों सहित अधिकांश अधिकारी रात 10 बजे के बाद अपने घर में शराब पीते हैं। मजे की बात यह है की इसका कोई आधिकारिक खंडन नहीं आया।
जीतन राम मांझी के उक्त बयान की सत्यता का प्रमाण हाल में खुद ब खुद सामने आ गया। कुछ ही दिन पूर्व पटना में मुख्यमंत्री आवास के पास महंगी शराब की करीब एक दर्जन खाली बोतलें फेंकी मिली थी। वह पूरा क्षेत्र कड़ी सुरक्षा निगरानी वाला क्षेत्र हैं। बगल में राज्यपाल का भी आधिकारिक निवास है। मंत्री, न्यायाधीश और बड़े नौकरशाह उस इलाके में रहते हैं।
जाहिर है वहां बाहर से आकर कोई शराब की खाली बोतलें फेंकने का दुस्साहस नहीं करेगा। इसके पहले विधानसभा परिसर और सचिवालय परिसर में भी शराब की खाली बोतलें मिली थीं। ये सभी अति सुरक्षित क्षेत्र हैं। इससे मदिरा के शौक़ीन नेताओं को शराबबंदी के खिलाफ बोलने का मुद्दा मिल गया है। इन मामलों का कोई सुराग पुलिस को नहीं मिल पाया है।
अभी मुख्यमंत्री आवास के पास जहां बोतलें फेंकी मिली, बताया गया कि वहां का सीसीटीवी कैमरा ख़राब था। यानी फेंकनेवाले को इस बात की जानकारी थी तभी उसने वह जगह चुनी ! यह जानकारी किसी बाहरी को तो नहीं हो सकती?
पुलिस की तमाम सख्ती के दावों के बाद भी बिहार में शराब की तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही है। इसने एक सामानांतर तंत्र बना लिया है। ऐसा नहीं है कि शराब पकड़ी नहीं जा रही। थोक मात्रा में बाहर से आनेवाली ट्रक की ट्रक शराब बरामद होती रहती है। गिरफ्तारियां भी होती हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अबतक शरबबंदी कानून के उल्लंघन में करीब 17 लाख लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। लेकिन ये सब कोरियर का काम करनेवाले हैं। इस धंधे का किंग पिन नहीं पकड़ा जाता। क्यों ? यह आप खुद सोचें।
अवैध शराब की बिक्री से इस धंधे में शामिल लोगों ने अकूत कमाई हो रही है। दो -चार बोतल सप्लाई करनेवालों की भी आर्थिक हैसियत बदल गई है। शासन -प्रशासन सबको कमाई का एक अच्छा स्रोत मिल गया है। एक शराब कंपनी द्वारा चुनाव में राजद को चंदा देने का मामला भी एनडीए ने खूब उछाला था। मदिरा और उसके पैसे की माया बड़ी निराली है। उससे बचाना बड़े -बड़ों के लिए कठिन हो जाता है।
मालूम हो कि बिहार में सभी दलों की सहमति से 2016 से शराबबंदी लागू है। हालांकि अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के अनेक नेता इसकी समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं। नीतीश सरकार ने बहुत सख्त शराबबंदी कानून बनाया था। लेकिन समय बीतने के साथ पटना हाईकोर्ट ने कानून को सरल कर दिया।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

