“जब पूरा देश सो रहा था, तब कोई आसमान की रखवाली कर रहा था।”…

“जब पूरा देश सो रहा था, तब कोई आसमान की रखवाली कर रहा था।”…

जामताड़ा(JAMTADA): भारत की सभ्यता ने सदियों से वीरों को जन्म दिया है।
कभी सीमा पर तलवार लेकर खड़े महाराणा प्रताप। कभी आकाश में उड़ान भरते आधुनिक योद्धा। समय बदलता गया। युद्ध के तरीके बदलते गए। लेकिन भारत माता की रक्षा का संकल्प कभी नहीं बदला।

आज का युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता।
अब लड़ाई आसमान में भी होती है। तकनीक में भी होती है। और निर्णय लेने की गति में भी होती है। ऐसे समय में भारतीय वायुसेना केवल एक सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांसों की सुरक्षा बनकर खड़ी दिखाई देती है।

हाल के दिनों में जिस प्रकार भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने संभावित बड़े खतरे को आसमान में ही समाप्त कर दिया, उसने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय रक्षा क्षमता से लैस आत्मविश्वासी राष्ट्र बन चुका है।

और इसी कहानी के केंद्र में दिखाई देते हैं — रोहित कपिल।

“जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध।”

रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियाँ आज भी राष्ट्र चेतना को झकझोरती हैं।
भारत की सेना तटस्थ नहीं रहती।
जब राष्ट्र पर खतरा आता है, तब कोई जवान बर्फ में खड़ा हो जाता है। कोई रेगिस्तान में तपता है। और कोई आसमान में मौत को रोकने के लिए जागता रहता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अधिकांश भारतीयों को यही जानकारी थी कि पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और भारी गोलाबारी की कोशिशें हुईं।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उसी समय भारत की राजधानी को निशाना बनाकर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागने की भी कोशिश की गई थी।

यह हमला केवल सैन्य चुनौती नहीं था, बल्कि भारत के मनोबल को तोड़ने का प्रयास भी था।
परंतु भारतीय वायुसेना की सतर्कता ने उस खतरे को दिल्ली तक पहुंचने से पहले ही समाप्त कर दिया।

सिरसा का आसमान और एक निर्णय जिसने इतिहास बदल दिया

रोहित कपिल उस समय सिरसा स्थित 45 विंग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
उनके पास बराक-8 वायु रक्षा प्रणाली की कमान थी।

जैसे ही संदिग्ध गतिविधि का संकेत मिला, पूरी यूनिट युद्ध स्तर पर सक्रिय हो गई।
कुछ ही क्षणों में निर्णय लेना था।
आसमान में दौड़ती बैलिस्टिक मिसाइल को रोकना कोई साधारण कार्य नहीं होता।

लेकिन भारतीय वायुसेना केवल मशीनों पर नहीं चलती।
वह अनुशासन, प्रशिक्षण और राष्ट्रभक्ति पर चलती है।

कुछ ही पलों में दुश्मन की मिसाइल आग के गोले में बदल गई।
दिल्ली सुरक्षित रही।
देश की करोड़ों सांसें सुरक्षित रहीं।

“हो गई है पीर पर्वत सी।”

दुष्यंत कुमार ने लिखा था—

“हो गई है पीर पर्वत सी, पिघलनी चाहिए।
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।”

भारतीय वायुसेना के ये अधिकारी उसी गंगा की तरह हैं, जो संकट के समय राष्ट्र को सुरक्षा और विश्वास प्रदान करते हैं।
वे मंचों पर भाषण नहीं देते। वे कैमरों के सामने नहीं आते। लेकिन उनका एक निर्णय लाखों लोगों का भविष्य सुरक्षित कर देता है।

बचपन से ही आसमान को छूने का सपना

कहा जाता है कि बचपन में ही रोहित कपिल को विमानों से विशेष लगाव था।
आसमान में उड़ते लड़ाकू विमानों को देखकर उनके भीतर भी राष्ट्र सेवा की लौ प्रज्वलित होती थी।

जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, उस उम्र में उनके भीतर अनुशासन और देशभक्ति के संस्कार आकार ले रहे थे।
यही संस्कार आगे चलकर उन्हें भारतीय वायुसेना के सबसे दक्ष अधिकारियों में शामिल करते हैं।

तकनीक, प्रशिक्षण और राष्ट्रभक्ति का संगम

3500 से अधिक उड़ान घंटे।
सुखोई-30 एमकेआई जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान उड़ाने का अनुभव।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पायलटों को प्रशिक्षण।
और श्रेणी-‘ए’ योग्य उड़ान प्रशिक्षक का सम्मान।

ये उपलब्धियाँ केवल पदक नहीं हैं।
ये उस कठोर साधना का परिणाम हैं, जो एक सैनिक अपने राष्ट्र के लिए करता है।

कुमार विश्वास की भावना याद आती है—

“कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है।
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है।”

देश की बेचैनी और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी को केवल वही समझ सकता है, जिसने राष्ट्र को सर्वोपरि मान लिया हो।

भारत की बदलती रक्षा शक्ति

एक समय था जब भारत रक्षा तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर माना जाता था।
लेकिन आज भारत की वायु रक्षा प्रणाली विश्वस्तर पर सम्मान के साथ देखी जाती है।

बराक-8 जैसी आधुनिक प्रणाली, प्रशिक्षित अधिकारी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब केवल सीमाओं की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि रणनीतिक शक्ति के रूप में विश्व मंच पर खड़ा है।

जब देश चैन से सो रहा था

उस रात दिल्ली शांत थी।
लोग अपने घरों में सो रहे थे।
किसी को अंदाजा तक नहीं था कि आसमान में एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

लेकिन उसी समय भारतीय वायुसेना के कुछ अधिकारी जाग रहे थे।
उनकी आंखें रडार पर थीं।
उनकी उंगलियां निर्णय पर थीं।
और उनके दिल में केवल एक नाम था — भारत।

अंतिम संदेश

भारत की सेना केवल सीमा की रक्षा नहीं करती।
वह देश के आत्मविश्वास की रक्षा करती है।

रोहित कपिल और उनकी पूरी टीम उन अनगिनत वीरों का प्रतीक है, जो बिना किसी प्रचार के राष्ट्र सेवा में समर्पित रहते हैं।

जब इतिहास लिखा जाएगा, तब यह अवश्य दर्ज होगा कि किसी रात जब पूरा देश चैन की नींद सो रहा था, तब भारतीय वायुसेना का एक प्रहरी आसमान में भारत की सांसों की रक्षा कर रहा था।

NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

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