DESK: आज जिस तरह सोशल मीडिया पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और पीएम मोदी के नाम को लेकर चर्चा हो रही है,कहा जाता है कि वैसा ही एक विवाद 1959 में भी हुआ था लेकिन उसकी कीमत एक आदिवासी महिला को पूरी ज़िंदगी चुकानी पड़ी।
धनबाद की संथाल आदिवासी युवती बुधनी मंजियाइन को दामोदर घाटी निगम परियोजना (DVC)के उद्घाटन के दौरान पंडित जवाहरलाल नेहरू के स्वागत के लिए चुना गया था।आज भी ये फोटो आप मैथन में देख सकते है।।बुधनी ने नेहरू जी को माला पहनाई और जवाब में नेहरू जी ने भी उसके गले में माला डाल दी। उस समय शायद यह केवल सम्मान और औपचारिकता का प्रतीक रहा हो, लेकिन गाँव की परंपराओं ने इसे अलग अर्थ दे दिया।
जब बुधनी अपने गाँव लौटी तो पंचायत ने कहा कि माला पहनाने की इस रस्म के बाद दोनों पति-पत्नी माने जाएँगे। इसके बाद उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। परिवार ने भी साथ छोड़ दिया और दामोदर घाटी निगम की नौकरी भी चली गई। धीरे-धीरे लोग उसे “नेहरू की आदिवासी पत्नी” कहकर ताने देने लगे।
कहा जाता है कि बाद में वह धनबाद छोड़कर कहीं और बस गई और बेहद कठिन जीवन जिया। वर्षों बाद कुछ मदद मिलने की बातें जरूर कही गईं, लेकिन जो सामाजिक पीड़ा उसे झेलनी पड़ी, वह इतिहास का एक दुखद अध्याय बन गई।
आज “मेलोनी” और “मेलोडी” जैसे शब्दों पर चल रही हल्की-फुल्की राजनीति के बीच बुधनी मंजियाइन की यह कहानी याद आना स्वाभाविक है क्योंकि इतिहास कभी-कभी मज़ाक और दर्द के बीच का फर्क भी दिखा देता है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

