नई दिल्ली(NEW DELHI): नई दिल्ली में शुक्रवार को राजनीति का बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। तीनों नेताओं ने पहले कान्स्टीट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AAP से अलग होने का ऐलान किया। इस दौरान राघव चड्ढा ने खुलकर कहा कि आम आदमी पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से पूरी तरह भटक चुकी है। उन्होंने कहा कि जिस सोच और आदर्शों के साथ पार्टी की शुरुआत हुई थी, अब वह रास्ता पूरी तरह बदल चुका है।
भाजपा मुख्यालय पहुंचकर नितिन नवीन से मुलाकात
प्रेस वार्ता के बाद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भाजपा मुख्यालय पहुंचे। वहां भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीनों नेताओं का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। बताया गया कि नितिन नवीन और तीनों सांसदों के बीच करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक बंद कमरे में बातचीत हुई। इस मुलाकात को आने वाले दिनों की बड़ी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राघव बोले, दो-तिहाई से ज्यादा सांसद साथ
राघव चड्ढा ने दावा किया कि सिर्फ तीन सांसद ही नहीं, बल्कि AAP के कई और राज्यसभा सदस्य भी भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा सदस्य भाजपा में विलय के पक्ष में हैं और संविधान के प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया जा रहा है। राघव ने साफ शब्दों में कहा, “हमने फैसला लिया है कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को भाजपा में विलय करते हैं।”
15 साल की मेहनत का दिया हवाला
राघव चड्ढा ने भावुक अंदाज में कहा कि AAP को कार्यकर्ताओं ने अपने खून-पसीने से खड़ा किया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जवानी के 15 साल इस पार्टी को दिए, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि वहां बने रहना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि पार्टी अब उस रास्ते पर नहीं है, जिसके लिए लोगों ने उस पर भरोसा किया था। सिद्धांतों से समझौता और नैतिक गिरावट ने उन्हें यह फैसला लेने पर मजबूर किया।
दिल्ली की राजनीति में बढ़ेगी हलचल
राघव चड्ढा जैसे बड़े चेहरे का AAP छोड़कर BJP में जाना दिल्ली की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है। इससे आने वाले समय में आम आदमी पार्टी की अंदरूनी राजनीति और राज्यसभा की ताकत पर भी असर पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर और सांसद भी इस रास्ते पर चलते हैं, तो AAP के लिए यह बड़ा झटका साबित हो सकता है।
NEWSANP के लिए नई दिल्ली से ब्यूरो रिपोर्ट
