यह हैं प्रणब राय— एक ऐसा नाम जिसने भारतीय मीडिया में निष्पक्ष पत्रकारिता की मिसाल कायम की.. सत्ता की दलाली नहीं की..
वो NDTV, जो कभी सत्ता से सवाल पूछता था, सच्चाई दिखाता था, और हर दिन नए खुलासों के लिए जाना जाता था… आंकड़ों और तथ्यों के साथ देश को सच्चाई बताता था..आज उसी NDTV का नियंत्रण Gautam Adani के हाथों में है। बैकडोर से उसकी कंपनी को खरीद लिया गया.. प्रणव और रविश जैसे पत्रकार सड़क पर आ गए..मगर उन्होंने अपनी जमीर का सौदा नहीं किया..गोदी मीडिया बनना मंजूर नहीं किया…
हालात खराब होने के बाद भी कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
जिस इंसान ने देश के सबसे बड़े न्यूज़ चैनल को खड़ा किया, क्या उसके पास संसाधनों की कमी हो सकती है? बिल्कुल नहीं।
फिर भी आज Prannoy Roy ज़मीन पर उतरकर, बंगाल की गलियों में खुद रिपोर्टिंग करते नज़र आते हैं।
वो अब The Decoder के को-फाउंडर हैं — जहाँ एक पूरी टीम काम करती है, लेकिन फिर भी उन्होंने खुद फील्ड में जाकर सच्चाई दिखाने का रास्ता चुना।
ये सिर्फ पत्रकारिता नहीं, ये जुनून है…
ये सिर्फ काम नहीं, ये एक मिशन है…
सब्र और शुक्र — यही इंसान का सबसे बड़ा हथियार है। पत्रकारिता एक जुनून है जो जनता और सरकार के बीच माध्यम बन कर सच से अवगत कराने की जिद से जुड़ी है…आज मेन स्ट्रीम की गुलाम मीडिया कभी भी भारत की जनमानस के लिए उदाहरण नहीं बन सकती… राष्ट्रीय गुमराह खबरियां चैनलों के बीच कोई तो है जो डटकर शान से खड़ा है..वेबमीडिया के जमाने में सोशल मीडिया ही भारत की पत्रकारिता का धर्म निर्वाह कर रहे है..जबकि मेन स्ट्रीम की मीडिया यहां भी अंधभक्ति का कूड़ा फैला रहें है..भारत पाकिस्तान और हिन्दू मुसलमान से दो कदम आगे बढ़कर देश की गरीबी ,बेरोजगारी , अशिक्षा, अंधविश्वास और स्वास्थ की समस्या,जनसंख्या विस्फोट के खतरे जैसे उनके लिए खबर ही नहीं है..चुनाव में भी नेताओं के भाषण के आगे कोई खबर नहीं…दरअसल मीडिया की गुलाम मानसिकता ही देश को पीछे धकेल रही है..गोदी मीडिया से जनता का मोह भंग हो गया है… प्रणव रॉय जैसे लोग पत्रकारिता की मिशाल है..जो अधेड़ उम्र में जीवटता के साथ ख़बर के साथ संजीदा पत्रकारिता कर आईना दिखा रहे है…
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

