सरकार ने हाल में चीनी CCTV कैमरों के सार्वजनिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाया। लेकिन सरकारी इमारतों के अंदर चीनी कैमरे अब भी लगे हुए हैं। प्रतिबंधित चीनी ऐप्स बदले हुए नामों के साथ फिर से सामने आ रहे हैं। विदेशी AI प्लेटफॉर्म संवेदनशील डेटा प्रोसेस कर रहे हैं। और सरकार के पास इन सब पर कहने के लिए कुछ भी नहीं है।
मैंने संसद में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय से सवाल पूछा। जवाब में बहुत कुछ कहा गया, लेकिन जो पूछा गया था उसका कोई जवाब नहीं मिला।
हमारे कैमरे किन देशों से आए? उनमें से कितने सुरक्षा की दृष्टि से प्रमाणित हैं? कौन से विदेशी AI प्लेटफॉर्म सरकारी डेटा प्रोसेस कर रहे हैं? कौन से प्रतिबंधित ऐप्स बदले नामों के साथ अब भी चल रहे हैं?
मंत्रालय के जवाब में न कोई संख्या, न कोई जवाब, एक भी प्लेटफॉर्म का नाम तक नहीं।
पांच साल पहले यह मानने के बाद कि सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 10 लाख चीनी कैमरे डेटा ट्रांसफर के जोखिम पैदा करते हैं, आज भी सरकार ने ये नहीं बताया कि आज जो कैमरे हम पर नज़र रख रहे हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं।
यह जानबूझकर भारत को अंधेरे में रखने की साजिश है।
मोदी सरकार अपनी नाकामी पर पर्दा डाल विदेशी निगरानी की सच्चाई छिपा कर हर नागरिक की सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

