अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले जारी इस पत्र मे अमेरिकी जनता से सीधे संवाद किया गया है।
पत्र की प्रमुख बातें
कोई दुश्मनी नहीं
ईरान अमेरिकी लोगों, यूरोपियों या पड़ोसी देशों के प्रति कोई शत्रुता नहीं रखता। ईरान को खतरा बताना ऐतिहासिक सच्चाई और वर्तमान तथ्यों से मेल नहीं खाता। यह राजनीतिक और आर्थिक हितों से प्रेरित “निर्मित दुश्मन” की छवि है।
रक्षा का अधिकार
ईरान ने जो कुछ किया, वह आक्रमण नहीं बल्कि उसका वैध आत्मरक्षा है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों का जवाब दिया गया है।
युद्ध के हित?
अमेरिकी लोगों से पूछा कि इस युद्ध से अमेरिका के किन हितों की रक्षा हो रही है? ‘America First’ नीति आज अमेरिकी सरकार की वास्तविक प्राथमिकता है या नहीं? क्या मासूम बच्चों की हत्या, कैंसर उपचार वाली दवा फैक्टरियों का विनाश या ‘पत्थर के युग में वापस ले जाना’ जैसी धमकियां अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने के अलावा कुछ करती हैं?
इज़राइल का प्रॉक्सी
अमेरिका इस युद्ध में इजरायल का ‘प्रॉक्सी’ बनकर काम कर रहा है। इजरायल चाहता है कि ईरान से लड़ाई आखिरी अमेरिकी सैनिक और आखिरी अमेरिकी टैक्सपेयर के डॉलर तक लड़ी जाए।
गलत सूचना से बचें
अमेरिकी लोगों से अपील की कि ‘गलत सूचना और प्रचार’ से परे देखें। ईरान ने आधुनिक इतिहास में कभी आक्रमण या विस्तारवाद नहीं किया। ईरानी लोग शांतिप्रिय हैं और ईरान में पढ़े-लिखे ईरानी प्रवासी अमेरिका और पश्चिम में अच्छा योगदान दे रहे हैं।
संवाद का रास्ता
संघर्ष का रास्ता महंगा और व्यर्थ है। संवाद और जुड़ाव बेहतर विकल्प है, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा।
पत्र में उन्होंने 1953 के ईरानी तख़्तापलट, सद्दाम को समर्थन, लंबे प्रतिबंधों और हाल के सैन्य हमलों का जिक्र कर अमेरिका पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया। साथ ही चेतावनी दी कि ईरान की महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला युद्ध अपराध होगा, जिसके परिणाम ईरान से आगे जाएंगे।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

