DESK: इस साल भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है — एक बड़ा सम्मान, लेकिन इसके साथ आई है एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने BRICS देशों के बीच मतभेद को गहरा कर दिया है।
एक तरफ है ईरान, जो BRICS से अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की मांग कर रहा है।
दूसरी ओर हैं सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, जो ईरान के खिलाफ प्रस्ताव लाने की बात कर रहे हैं।
ऐसे में भारत, जो इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, एक बेहद संवेदनशील स्थिति में फंस गया है।
भारत न तो किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करना चाहता है, और न ही BRICS की एकता को कमजोर होने देना चाहता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है —
BRICS शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन और एक ऐसा साझा घोषणापत्र तैयार करना,
जिसमें सभी देशों की सहमति हो, खासकर मध्य पूर्व के मुद्दे पर।
लेकिन जब सदस्य देश ही एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हों,
तो सहमति बनाना आसान नहीं होता।
अब सवाल यह है —
क्या भारत अपनी कूटनीतिक संतुलन क्षमता से BRICS को एकजुट रख पाएगा,
या यह मंच भी वैश्विक राजनीति के टकराव का शिकार हो जाएगा?
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

