DESK: भारत का मौसम इन दिनों अचानक करवट ले रहा है। कभी तपती धूप, कभी झमाझम बारिश और फिर हल्की ठंड, ऐसा लगता है जैसे मौसम ने अपने पुराने नियम बदल दिये हों। राजधानी नई दिल्ली से लेकर देश के कई हिस्सों तक लोग इन दिनों एक ही सवाल पूछ रहे हैं, क्या भारत का मौसम सचमुच बदल रहा है? विशेषज्ञों के मुताबिक मार्च 2026 मौसम के इस बदलते मिजाज का बड़ा उदाहरण बन गया है।
महीने की शुरुआत में कई इलाकों में तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा दर्ज किया गया। लोग भीषण गर्मी और लू के लिये तैयार हो ही रहे थे कि अचानक पश्चिमी विक्षोभ की वजह से उत्तर भारत में बारिश हो गई और तापमान में गिरावट आ गई। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ संकेत दिया कि मौसम अब पहले जैसा स्थिर नहीं रहा। भारत के मौसम विभाग India Meteorological Department और जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि यह महीनों का बदलाव नहीं, बल्कि मौसमों का आपस में “मिल जाना” है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत के मौसमी चक्र में संरचनात्मक बदलाव हो रहा है। मौसम विशेषज् के अनुसार अब सर्दियों की शुरुआत देर से होती है और ठंड बहुत कम समय के लिये अपने चरम पर रहती है। जनवरी के बाद ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और कई जगहों पर ऐसा लगता है जैसे देश सीधे सर्दी से गर्मी में प्रवेश कर रहा हो। इस साल मार्च की शुरुआत में ही गुजरात, राजस्थान और विदर्भ के कुछ इलाकों में तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
हालांकि महीने के दूसरे हिस्से में बारिश और बादलों की वजह से थोड़ी राहत मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का उतार-चढ़ाव अब भविष्य में और आम हो सकता है। जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का व्यवहार भी बदल सकता है। अब बारिश का वितरण असंतुलित हो सकता है, कुछ क्षेत्रों में बाढ़ तो कहीं सूखे जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि बारिश की अनियमितता का सबसे बड़ा असर कृषि और जल संसाधनों पर पड़ सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञ का कहना है कि तेजी से फैलते शहर भी इस बदलाव को तेज कर रहे हैं। हरियाली की जगह कंक्रीट बढ़ने से “अर्बन हीट आइलैंड” बन रहे हैं, जिससे शहरों में तापमान ज्यादा और मौसम ज्यादा अस्थिर हो रहा है।
NEWSANP के लिए रांची ब्यूरो रिपोर्ट

