नई दिल्ली(NEW DELHI): अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध रविवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस दौरान अमेरिकी हमले खासतौर पर ईरान के खर्ग द्वीप पर केंद्रित रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने यहां 90 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों में हवाई रक्षा प्रणाली, नौसैनिक अड्डे और हवाई अड्डे शामिल हैं, हालांकि तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे को अभी तक निशाना नहीं बनाया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन को बाधित करता है, तो तेल संबंधी ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने अन्य देशों से भी युद्धपोत भेजकर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। ट्रंप का दावा है कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक नष्ट कर दी गई है, हालांकि ड्रोन हमलों का खतरा अभी भी बना हुआ है।
वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हिजबुल्लाह के साथ मिलकर इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं। इसके अलावा बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर दूसरी बार हमला हुआ है। खाड़ी क्षेत्र में सऊदी अरब और कतर पर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान का नया नेता गंभीर रूप से घायल हो गया है।
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े पैमाने पर हमले किए थे। इन हमलों में कई ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा और कई अमेरिकी सैनिक भी मारे गए। युद्ध के चलते तेहरान में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र ने इस संघर्ष में बढ़ रहे नागरिक हताहतों पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह युद्ध लंबा और जटिल हो सकता है और प्रभावी कूटनीति तथा वैश्विक सहयोग ही इस संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता बन सकता है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

