DESK: यह देखकर दिल दुखता है कि एक ऐसी war, जिससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है, उसकी कीमत भारत को raw materials की कमी के रूप में चुकानी पड़ रही है। लेकिन सच यह है कि हमें यह कीमत चुकाने की ज़रूरत ही नहीं है। आखिर हम 90% oil बाहर से क्यों मँगाएँ? 95% copper, 99.5% gold, इतना import हमें क्यों करना पड़ता है? जब धरती माँ ने हमें अपने देश में ही सब कुछ दिया है। 40 साल इस industry में काम करने के बाद मैं यह बात पूरे यकीन के साथ कह सकता हूँ कि हमारी geology दुनिया में सबसे बेहतरीन है और आज के हालातों को देखते हुए अब समय आ गया है कि वर्तमान की सकारात्मक सरकार तत्काल उद्यमियों को इस क्षेत्र में काम करने की पूरी स्वतंत्रता दे।
मैं 19 साल की उम्र में बिहार से बॉम्बे आया था, zero से शुरू किया। कोई connection नहीं, कोई godfather नहीं। सिर्फ एक सपना था कि इस देश को किसी चीज़ के लिए दूसरों के आगे हाथ नहीं फैलाना चाहिए। Vedanta ने privatisation programme के तहत Hindustan Zinc और BALCO लिया। लेकिन वो programme आज भी अधूरा है। सरकार के पास अभी भी 26% और 49% stake है, जो agreement के हिसाब से transfer होना चाहिए था। हमने UK की Cairn के ज़रिए ONGC के oil और gas assets लिए, Japan की Mitsui से Sesa Goa Iron Ore खरीदा।
हर acquisition के पीछे एक ही सपना था: production इतना बढ़ाओ कि भारत importer नहीं, exporter बने। Hindustan Zinc और BALCO में हम इस सपने में काफी हद तक कामयाब हुए। Zinc का production 10 गुना बढ़ाया गया और aluminium का 20 गुना। इसकी वजह से 1,000 से ज़्यादा companies इस raw material को process करने के लिए खड़ी हो गईं। पिछले 10 सालों में Vedanta ने सरकारी ख़ज़ाने में ₹4.5 लाख करोड़ दिए हैं। अब Oil और gas में हमारा target है 10 लाख barrels per day का उत्पादन। Iron ore में हमारा vision है 10 करोड़ tonnes का उत्पादन, मतलब हमारे आज के level का तीन गुना। और ये सब कहते हुए मैं सिर्फ Vedanta को ध्यान में नहीं रख रहा हूँ, हमारे ऐसे कई government assets हैं जो अभी underperform कर रहे हैं, और मुझे लगता है वो भी इसी तरह बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
जब हमने शुरुआत की थी, तब इस industry में न technology थी, न experts, न finance। काम करने के लिए बहुत दृढ़ संकल्प की आवश्यकता थी। उस समय Vedanta ने विदेश से 35 अरब डॉलर जुटाकर भारत में invest किए। Experts लाए, technology लाए। इसी वजह से आज Hindustan Zinc silver और fertiliser भी बनाता है। और बहुत जल्द हम critical minerals का उत्पादन शुरू करने के लिए मेहनत कर रहे हैं, जिनके बारे में लोग कहते थे कि यह भारत में possible ही नहीं है। Mining एक ऐसा sector है जहाँ scale के बिना कुछ नहीं होता। मुझे लगता है आज के दौर में Vedanta को वही role निभाना है जो Rio Tinto और BHP Australia के लिए निभाते हैं, Vale जो काम Brazil के लिए करती है। और मैं दिल से चाहता हूँ कि दूसरे entrepreneurs और कम्पनियाँ भी Vedanta जैसी और नई कम्पनियाँ खड़ी करें।
दुनिया के ज़्यादातर developed देश अपने natural resources develop करके समृद्ध बने हैं। अब भारत की बारी है, और इसके लिए सबसे ज़रूरी कदम के रूप में system को काम में बाधाएँ खड़ी करना बंद करना होगा। क्योंकि यह government revenue-minded नहीं, production-minded है, तो मुझे उम्मीद भी मिलती है कि आने वाले समय में ऐसा ज़रूर होगा। लेकिन अभी की परिस्थितियों को देखते हुए हमें long-term सोचना होगा। अब समय आ गया है कि उद्यमों को Notices और judicial actions की जगह पहचान और सम्मान मिले। उन्हें बेनिफिट ऑफ डाउट मिले।
मुझे अच्छी तरह याद है कि Rio Tinto ने Madhya Pradesh में diamond mine में invest किया था। वह प्रोजेक्ट India को diamonds का global hub बना सकता था। लेकिन system इतना complex, इतना interfering था कि उन्हें वहां से निकलना पड़ा। अब हम ये afford नहीं कर सकते। इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है, और इसके लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है trust।
व्यवस्था को सरल रखें और नियमों को सीमित रखें तो गलतियों की जड़ अपने आप समाप्त हो जाएगी। Lengthy approvals की जगह self-certification हो, जिसका audit हो सके। Government rulebook दे, entrepreneur उसे follow करे। Constant enquiry और interference से enterprise खत्म होती है। और public sector और private sector के बीच जो discrimination की मानसिकता है, वो भी बदलनी चाहिए। और अगर ऐसा हुआ तो भारत में हमारे पास ऐसे आर्थिक नायक हैं जो दुनिया के सबसे बड़े और सर्वश्रेष्ठ देशों के बराबर उत्पादन कर सकते हैं। इसलिए हमें संकीर्ण दृष्टिकोण या पुरानी सोच के कारण अपने आप को छोटा और निर्भर नहीं रहने देना चाहिए।
इस साल मेरे परिवार पर सबसे बड़ी मुसीबत आई। ऐसे समय में प्रधानमंत्री के शब्द सुनकर मुझे बहुत हौसला मिला। उन्होंने कहा, “आपको मजबूत रहना चाहिए और वह काम जारी रखना चाहिए जो भारत के लिए महत्वपूर्ण है।” यही मेरे जीवन की प्रेरणा है। मुझे अपने दादा-दादी का आशीर्वाद मिला है, जिन्होंने वृंदावन में अपने गुरुजी स्वामी शरणानंद जी महाराज के साथ मानव सेवा संघ में एक छोटी सी कुटिया में 40 वर्ष बिताए। वे हमेशा कहते थे – यदि आपके पास संपत्ति है, तो उसे समाज के लिए उपयोग में लाओ। यदि आपके पास संपत्ति नहीं है, तो अपने हाथों से समाज की सेवा करो।
हम सभी कड़ी मेहनत करने, जोखिम लेने और यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं कि भारत आत्मनिर्भर बने। बस इस अपेक्षा के साथ कि व्यवस्था हमें समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करे; यह क्षेत्र भारत ही नहीं, पूरे विश्व में राष्ट्र निर्माण के लिए सरकारी खजाने को सबसे अधिक राजस्व देने वाला क्षेत्र रहा है। इसमें सुधार और प्रगति होने से बेरोज़गारी दूर होगी, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा, देश आत्मनिर्भर होगा और यह हमारे देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करेगा, जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री ने सपना देखा है।
तो आइए, एक साथ मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ें।
भारत और भारतीयों को गर्व महसूस कराएँ।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

