ब्रिटिश दौर की विरासत पर लगी जंग रोड रोलर की हालत देख उठ रहे संरक्षण के सवाल…

ब्रिटिश दौर की विरासत पर लगी जंग रोड रोलर की हालत देख उठ रहे संरक्षण के सवाल…

बंगाल को अन्य राज्यों से जोड़ने मे विकास का पहिया घुमाने वाला आज प्रशासनिक की अनदेखी का हुआ शिकार …

इतिहास का धरोहर बना कबाड़ ऐतिहासिक विरासत अब जंग खाकर हो रहा बर्बाद…

आसनसोल(WEST BENGAL):आसनसोल के भगत सिंह मोड़ स्थित चौराहे के किनारे खड़े ब्रिटिश काल के दो ऐतिहासिक मार्शल स्टीम रोड रोलर आज प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही के कारण जंग खाकर नष्ट होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

इन दोनों रोड रोलरों के आसपास इतनी घनी झाड़ियां और जंगल उग आए हैं कि वहां तक पहुंच पाना भी मुश्किल हो गया है। हैरानी की बात यह है कि यह जगह शहर के एक व्यस्त चौराहे पर स्थित है, इसके बावजूद इन ऐतिहासिक धरोहरों की ओर किसी का ध्यान नहीं गया।
उसी स्थान के ठीक पास आसनसोल नगर निगम द्वारा एक पार्क का निर्माण किया गया है और विश्व बांग्ला का स्मारक भी बनाया गया है, जहां देश के महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई है। लेकिन कभी इलाके में विकास का पहिया घुमाने वाले इन ऐतिहासिक रोड रोलरों को प्रशासन मानो पूरी तरह भूल चुका है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन रोड रोलरों ने अपने समय में इलाके की सड़कों और रेलवे ट्रैक के निर्माण में अहम भूमिका निभाई होगी। ऐसे में आसनसोल में मौजूद इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर की अनदेखी कई सवाल खड़े करती है।
हालांकि इस मामले में आसनसोल नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय ने आश्वासन दिया है कि निगम जल्द ही अपने खर्च पर ऐसी व्यवस्था करेगा जिससे इन दोनों ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सके। उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियां इन मशीनों को देखकर यह समझ सकेंगी कि विज्ञान और तकनीक ने समय के साथ किस तरह प्रगति की है।

जानकारों के अनुसार इंग्लैंड में निर्मित मार्शल स्टीम रोड रोलर का वजन करीब 30 टन है। इसके अलावा इस स्टीम रोड रोलर की एक सबसे बड़ी खासियत यह है की इस रोड रोलर के एक पुर्जे को दूसरे पुर्जे के साथ जोड़ने के लिये नट- बल्ट या फिर लोहे के किल की रिपीट लगाकर की गई है, कहीं भी पुरजों को जोड़ने के लिये वेल्डिंग नही किया गया है, यह मशीन Marshall, Sons & Company द्वारा बनाई गई थी, जिसकी स्थापना वर्ष 1848 में हुई थी और यह कंपनी ब्रिटानिया आयरन वर्क्स के अधीन कार्य करती थी। इसके अलावा John Fowler and Company भी स्टीम रोड रोलर के निर्माण के लिए जानी जाती थी।
बताया जाता है कि इन मशीनों के आने से पहले सड़क निर्माण के लिए हाथियों और बैलगाड़ियों का सहारा लिया जाता था। बाद में लकड़ी और कोयले से उत्पन्न भाप से चलने वाले स्टीम रोड रोलरों का उपयोग शुरू हुआ।

इतिहासकारों के अनुसार 1863 से 1914 के बीच इंग्लैंड की Marshall & Sons कंपनी से भारत में रेलवे लाइन और सड़कों के निर्माण के लिए कई स्टीम रोड रोलर मंगाए गए थे। देश के कई हिस्सों में आज भी इन मशीनों को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित रखा गया है।
अब आसनसोल में मौजूद इन दो स्टीम रोड रोलरों को बचाने के लिए स्थानीय लोग भी आवाज उठाने लगे हैं। लोगों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द पहल कर इन ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करे, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और तकनीकी विकास की इस विरासत को करीब से देख और समझ सकें।

NEWSANP के लिए अतिक रहमान की रिपोर्ट

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