अरुणाचल प्रदेश: निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को ट्रांस-अरुणाचल हाईवे से जुड़े मुआवजा घोटाले में कार्रवाई करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत छापेमारी अभियान शुरू किया। यह मामला भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजे के आकलन, प्रमाणन और वितरण में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
Lजांच में सामने आई मिलीभगत और गबन
ईडी के अनुसार, सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों के कथित मिलीभगत के जरिए अवैध आय अर्जित की गई और बाद में उसे धन शोधन किया गया।
परियोजना कुल 157.70 किलोमीटर लंबी थी और इसे प्रशासनिक रूप से याचुली, जीरो और रागा सेक्टरों में विभाजित किया गया। जांच में पाया गया कि जीरो सेक्टर के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ने पोटिन–बोपी खंड के लिए 289.40 करोड़ रुपए का मुआवजा आकलन तैयार किया था। बाद में राज्य स्तरीय बैठक में इसे 198.56 करोड़ रुपए पर सीमित कर दिया गया।
फर्जी लाभार्थियों और डायवर्ट किए गए धन की जानकारी
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि मुआवजा वितरण के दौरान भारी मात्रा में धन बचत खातों में डायवर्ट किया गया और कई फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी किए गए। इसके कारण सरकारी खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
जांच एजेंसी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर आकलन तैयार किया और अवैध रूप से मुआवजा दिलाया।
तलाशी अभियान और बरामदगी
ईडी ने मामले में 6 आवासीय परिसरों पर छापेमारी की है। इनमें तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, डीएलआरएसओ, आकलन से जुड़े अधिकारी और प्रमुख निजी लाभार्थियों के ठिकाने शामिल हैं।
- चार परिसर इटानगर और आसपास स्थित हैं।
- एक लिकाबाली (डिब्रूगढ़ के पास)।
- एक आलो (मेचुका-चीन सीमा के नजदीक)।
तलाशी के दौरान एक फर्जी लाभार्थी के परिसर से 2.2 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए। ईडी ने कहा कि अपराध की आय से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान के लिए जांच जारी है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

