वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 9वीं बार पेश करेंगी केंद्रीय बजट…

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 9वीं बार पेश करेंगी केंद्रीय बजट…

सभी की निगाहें बहुप्रतीक्षित सीमा शुल्क सुधारों पर टिकीं, कई गंभीर आर्थिक चुनौतियाँ भी सरकार के सामने खड़ी

नई दिल्ली(NEW DELHI): वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, एक फरवरी को लगातार 9वीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इस बार सभी की निगाहें बहुप्रतीक्षित सीमा शुल्क सुधारों पर टिकी होंगी।

सीतारमण वर्ष 2019 में अपने पहले केंद्रीय बजट में दशकों से चली आ रही दस्तावेज़ और चमड़े के ब्रीफकेस की परंपरा को समाप्त कर पारंपरिक ‘बही-खाता’ का उपयोग करने वाली पहली वित्त मंत्री बनी थीं। पिछले 4 वर्षों तक सरकार का बजट भी काग़ज़ रहित (पेपरलेस) रूप में पेश किया गया।

भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और आने वाले दो वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में बजट वर्ष में कई गंभीर आर्थिक चुनौतियाँ भी सरकार के सामने होंगी।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते समय वित्त मंत्री किन प्रमुख चुनौतियों से निपटने की रणनीति अपनाती हैं।

राजकोषीय घाटा

सरकार के कुल खर्च और आय के बीच का अंतर राजकोषीय घाटा कहलाता है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसे जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर बनाए रखने का अनुमान लगाया गया है। केंद्र सरकार की मंशा इसे क्रमशः घटाने की है।

वित्त वर्ष 2024-25 में यह घाटा 4.5 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक इसे और कम किया जाए।

पूंजीगत व्यय

चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने पूंजीगत व्यय को बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके लिए लगभग 11.2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचे में निवेश से आर्थिक विकास को गति मिलेगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

कर्ज़ की स्थिति

वित्त मंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार कर्ज़-से-जीडीपी अनुपात को धीरे-धीरे कम करने की दिशा में काम करेगी। वर्तमान में यह अनुपात लगभग 60 प्रतिशत के आसपास है।

राजस्व अनुमान

वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार का कुल राजस्व संग्रह लगभग 25.20 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जिसमें कॉरपोरेट कर, आयकर, सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क का प्रमुख योगदान होगा।

जीएसटी संग्रह में भी वृद्धि की उम्मीद है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में जीएसटी संग्रह 11.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।
वित्त मंत्री ने कहा…

वर्ष 2025–26 के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026–27 में भारत की जीडीपी विकास दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है।

सरकार ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश को लगातार 8 प्रतिशत या उससे अधिक की विकास दर बनाए रखना आवश्यक होगा।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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