सेवा, संकल्प और संवेदना की विदाईदिनकर की हुंकार और दुष्यंत की जनप्रतिबद्धता को समर्पित…

सेवा, संकल्प और संवेदना की विदाईदिनकर की हुंकार और दुष्यंत की जनप्रतिबद्धता को समर्पित…

जामताड़ा(JAMTADA): जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध*”—दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति उस लोकधर्म की याद दिलाती है, जहाँ कर्तव्य से विमुख होना भी एक अपराध है। वहीं रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ओजस्वी चेतना कहती है— *क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो*।” इन्हीं विचारों के आलोक में जामताड़ा में एक भावपूर्ण सेवानिवृत्ति समारोह आयोजित हुआ, जहाँ कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों और कर्मियों को सम्मान के साथ विदाई दी गई।

आईआरबी के डीएसपी विश्वनाथ सिंह एवं चालक कमलनाथ महतो को सेवानिवृत्ति के उपरांत गरिमामय विदाई दी गई। यह क्षण केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि उन वर्षों का सम्मान था, जो अनुशासन, साहस और जनसेवा के नाम रहे। दिनकर की पंक्तियों में कहें तो—यह विदाई उस कर्मवीर को नमन थी, जिसने विषम परिस्थितियों में भी धैर्य और विवेक को अपना शस्त्र बनाए रखा।

समारोह में निरीक्षक फारूक, निरीक्षक मनोज महतो और निरीक्षक चंद्रमणि भारती की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमा प्रदान की। इन अधिकारियों ने सेवानिवृत्त कर्मियों के साथ साझा स्मृतियों, संघर्षों और उपलब्धियों को याद करते हुए उनके योगदान को रेखांकित किया। यह उपस्थिति उस संस्थागत निरंतरता का प्रतीक थी, जहाँ अनुभव अगली पीढ़ी के लिए दीपक बनकर राह दिखाता है

इसी क्रम में भोलादास, पीपी जामताड़ा की सेवानिवृत्ति पर आयोजित समारोह भी भावनाओं से भरा रहा। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक, जामताड़ा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय श्रीवास्तव, एसीजेएम एवं एसडीजेएम की गरिमामय उपस्थिति ने न्यायिक-प्रशासनिक समन्वय की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। दुष्यंत कुमार की जनपक्षधर दृष्टि यहाँ साकार दिखी—जहाँ व्यवस्था मनुष्य के श्रम को पहचानती है और सम्मान देती है।

वक्ताओं ने कहा कि ये सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मी केवल पद से नहीं, बल्कि अपने नैतिक बल, अनुशासन और मानवीय संवेदना से पहचाने जाते रहे। कानून का पालन कराते हुए भी उन्होंने करुणा और विवेक को नहीं छोड़ा—यही वह संतुलन है, जिसे दिनकर ‘वीर रस’ के साथ ‘मानव रस’ का संगम कहते हैं।

समारोह के अंत में सभी ने सेवानिवृत्त साथियों के स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानित भविष्य की कामना की। यह विदाई नहीं, बल्कि उस परंपरा का उत्सव था, जहाँ सेवा की मशाल अगली पीढ़ी को सौंप दी जाती है—और समय गवाही देता है कि जिन्होंने तटस्थता नहीं चुनी, उन्होंने इतिहास में अपना स्थान स्वयं बनाया।

NEWSANP के लिए जामताड़ा से आर पी सिंह की रिपोर्ट

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