DESK:UGC के Equity Regulations को लेकर देशभर में चल रहे विरोध और भ्रम के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि
UGC के Equity Regulations में जो बदलाव किए गए हैं,
उन्हें लेकर संसदीय स्थायी समिति को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है,
जबकि सच्चाई यह है कि कई विवादित फैसले UGC ने स्वयं लिए हैं,
उनका समिति की सिफारिशों से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने साफ किया कि—
संसदीय समिति ने केवल
OBC को जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल करने,
दिव्यांगता को भेदभाव का आधार मानने,
और वार्षिक रिपोर्ट, मानसिक स्वास्थ्य सहायता व संवेदनशीलता प्रशिक्षण जैसी सिफारिशें दी थीं।
लेकिन Equity Committee में SC-ST-OBC का 50% प्रतिनिधित्व
और भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा तय करने जैसी अहम सिफारिशों को
UGC ने नजरअंदाज कर दिया।
वहीं, झूठी शिकायत पर सजा वाला प्रावधान हटाने का फैसला भी UGC का अपना निर्णय है,
इसका संसदीय समिति से कोई संबंध नहीं है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि
अगर भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा तय की जाती,
तो न केवल पीड़ित छात्रों को सुरक्षा मिलती,
बल्कि फर्जी मामलों की आशंका भी अपने आप खत्म हो जाती।
उन्होंने जोर देकर कहा कि
अब इस पूरे विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी
UGC और शिक्षा मंत्रालय की है,
ना कि संसद की समिति की।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

