जामताड़ा(JAMTADA): पालबगान स्थित सृजन पब्लिक स्कूल में क्रिसमस पर्व बड़े ही हर्षोल्लास, कौतूहल और बालसुलभ उत्साह के साथ मनाया गया। प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विद्यालय परिसर मानो रंग, संगीत और मुस्कान से सज उठा। नन्हे-नन्हे बच्चों की आंखों में जिज्ञासा, चेहरे पर उल्लास और कदमों में आत्मविश्वास स्पष्ट झलक रहा था।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभु यीशु के जीवन। उनके संदेश और मानवता के प्रति उनके प्रेम की संक्षिप्त प्रस्तुति से हुई। बच्चों ने सांता क्लॉज की वेशभूषा में मंच पर उतरकर न केवल दर्शकों को आनंदित किया। बल्कि भाईचारे और प्रेम का संदेश भी दिया। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नृत्य, गीत और लघु नाटिकाओं ने उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर बच्चों के भीतर छिपे राष्ट्रबोध और मानवीय मूल्यों को उभारने के लिए राष्ट्रकवि मैथिलीशरण मिश्र, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ और सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
मैथिलीशरण मिश्र की पंक्तियाँ— “मनुष्य बनो, यही सबसे बड़ा धर्म”— बच्चों के सरल अभिनय और भावपूर्ण वाचन के माध्यम से जीवंत हो उठीं। वहीं दिनकर की ओजस्वी चेतना ने यह संदेश दिया कि शक्ति और करुणा का संतुलन ही सच्ची मानवता है।
कार्यक्रम के दौरान सुभद्रा कुमारी चौहान की अमर पंक्तियाँ— “खूब लड़ी मर्दानी…”— को बच्चों ने बाल-सुलभ उत्साह से प्रस्तुत कर यह दिखा दिया कि साहस और देशप्रेम का बीज बचपन में ही बोया जा सकता है।
विद्यालय की प्राचार्य सीमा तिवारी ने बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि 25 दिसंबर प्रभु यीशु का जन्म दिवस है। इसी उपलक्ष्य में विश्वभर में क्रिसमस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस दिन लोग चर्च जाकर प्रार्थना करते हैं, केक और मिठाइयां बांटते हैं तथा प्रेम, सेवा और त्याग का संदेश फैलाते हैं। प्राचार्य ने बच्चों से आग्रह किया कि वे पर्वों को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि उनसे जुड़े मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की सभी शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं और उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। पूरे आयोजन में यह स्पष्ट दिखा कि सृजन पब्लिक स्कूल केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कार, संस्कृति और समरसता के निर्माण की दिशा में भी सजग प्रयास कर रहा है।
नन्हे बच्चों की खिलखिलाहट, कविताओं की राष्ट्रधारा और क्रिसमस का संदेश—यह आयोजन न केवल विद्यालय तक सीमित रहा, बल्कि समाज के लिए भी यह संदेश छोड़ गया कि बचपन में बोए गए संस्कार ही भविष्य की मजबूत नींव बनते हैं।
NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

