बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के कुप्रशासन का दंश वहां की हिंदू अल्पसंख्यक आबादी झेल रही है। एक तरफ युनूस ने शेख हसीना की विदेश नीति के उलट जाकर पाकिस्तान की गोद में बैठना उचित समझा है, तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपने देश में इस्लामिक कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए हैं।
नतीजा सामने हैं। बांग्लादेश में आए दिन इस्लामिक कट्टरपंथी हिंदुओं का प्रताड़ित कर रहे हैं और भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश में लगे हैं। बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या इसका ताजा उदाहरण है। खुद ढाका पुलिस ने माना है कि दीपू ने ऐसा कोई भड़काऊ पोस्ट नहीं किया था।
बांग्लादेश हिंसा के खिलाफ भारत में भी प्रदर्शन हुए और दीपू चंद्र दास को न्याय दिलाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाकर्मियों से झड़प तो हुई, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रही। बावजूद इसके बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर को तलब किया। उधर बांग्लादेश के कट्टरपंथियों ने यूनुस सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया। बांग्लादेश के दिल्ली स्थित हाई कमीशन ने वीजा संबंधी सभी सेवाओं को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया। दिल्ली स्थित हाई कमीशन पर मंगलवार को फिर से हिंदू संगठन एकत्रित हुए और बांग्लादेश में हिंदुओं को न्याय दिलाने की मांग की।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

