3 सितंबर को कैलिफोर्निया के सांता क्लारा में भारतीय इंजीनियर मोहम्मद निजामुद्दीन की हत्या का मामला विवादों में घिरता जा रहा है. शुरूआत में यह सिर्फ एक अपराधिक मामला लग रहा था लेकिन अब इसमें और भी चीजें सामने आ रही हैं. निजामुद्दीन ने खुद को नस्लीय भेदभाव का शिकार बताय था. उन्होंने LinkedIn पर लिखा था कि उन्हें नौकरी से गलत तरीके से निकाल दिया गया था और जांच करने वाले अधिकारी ने भी उन्हें परेशान किया. उन्होंने लोगों से अपने लिए न्याय की मांग भी की थी.
क्या काम करते थे मोहम्मद निजामुद्दीन?
मोहम्मद निजामुद्दीन तेलंगाना के महबूब नगर का रहने वाला था और उसने फ्लोरिडा के एक कॉलेज से Computer Science में मास्टर डिग्री ली थी और कैलिफोर्निया के सांता क्लारा में एक टेक कंपनी में काम करता था. उनके परिवार का कहना है कि, बहुत शांत और धार्मिक स्वभाव का था. निजामुद्दीन ने खुद को गलत तरीके से नौकरी से निकाले जाने का शिकार बताया और वेतन को लेकर भी धोखाधड़ी का आरोप लगाया था.
निजामुद्दीन ने पोस्ट में क्या लिखा था?
निजामुद्दीन ने LinkedIn पर पोस्ट में लिखा, ‘मैंने अपनी सारी परेशानियों के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया है अब बहुत हो गया’. अमेरिका में मौजूद White Supremacy और नस्लवादी सोच को खत्म होना चाहिए. कंपनियों की तानाशाही बंद होनी चाहिए और इसमें शामिल सभी लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. निजामुद्दीन ने यह भी बताया कि वह EPAM System नाम की कंपनी में काम करता है जो Google को सेवाएं देती हैं. उनका आरोप था कि इस कंपनी में उनके साथ नस्लीय भेदभाव किया जाता है.
खाने में जहर मिलाया गया
नौकरी जाने के बाद भी एक जासूस और उसकी टीम द्वारा उन्हें नस्लीय भेदभाव के कारण परेशान किया जाता रहा. स्थिति तब और खराब हो गई जब निजामुद्दीन के खाने में जहर मिला दिया गया और बाद में उन्हें घर से भी निकाल दिया गया. निजामुद्दीन ने अपनी पोस्ट में लिखा, “आज यह मेरे साथ हो रहा है, कल यह किसी के भी साथ हो सकता है. इसलिए मैं दुनिया से अपील करता हूं कि इन लोगों के अन्याय और गलत कामों के खिलाफ न्याय की मांग करें.”
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

