कौन हैं सबीह खान? मुरादाबाद में जन्मे, सिंगापुर में पढ़े, अब बने Apple के नए COO…

कौन हैं सबीह खान? मुरादाबाद में जन्मे, सिंगापुर में पढ़े, अब बने Apple के नए COO…

Apple COO Sabih Khan: भारत का नाम एक बार फिर ग्लोबल टेक स्टेज पर गर्व से चमका है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जन्मे और अमेरिका में बसे सबीह खान को दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक Apple ने अपना नया COO (Chief Operating Officer) बना दिया है। जैसे ही ये खबर आई, सोशल मीडिया से लेकर टेक इंडस्ट्री तक हर जगह सिर्फ एक ही नाम गूंजने लगा… “सबीह खान!”

कौन हैं सबीह खान?
1966 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में जन्मे सबीह ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सिंगापुर में की और फिर अमेरिका में सेटल हो गए। उन्होंने Tufts University से इकोनॉमिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग फिर RPI (Rensselaer Polytechnic Institute) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया। वही सबीह ने अपने करियर की शुरुआत GE Plastics से की और फिर 1995 में Apple से जुड़ गए। और आज, करीब 30 साल बाद, वे उसी कंपनी में COO बन गए हैं।

Apple को दुनिया तक पहुंचाने वाले चुपचाप योद्धा
सबीह खान Apple की प्रोक्योरमेंट टीम से शुरुआत करके धीरे-धीरे कंपनी की ग्लोबल ऑपरेशंस को नई ऊँचाइयों तक ले गए।

60% तक Apple का कार्बन फुटप्रिंट कम किया
अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का विस्तार
सप्लाई चेन को भविष्य के लिए तैयार किया
टेक्नोलॉजी + पर्यावरण का बेहतरीन संतुलन बनाया
Apple के CEO टिम कुक ने खुद कहा, “सबीह खान एक शानदार रणनीतिकार हैं, जिन्होंने भविष्य के लिए Apple को तैयार किया है।”

भारत के लिए क्या मायने रखता है सबीह का COO बनना?
इस नियुक्ति के पीछे सिर्फ प्रमोशन नहीं, बल्कि एक बड़ा संकेत छिपा है। Apple अब भारत को एक बड़ा प्रोडक्शन और मार्केट हब मान रहा है। ऐसे में एक भारतीय मूल का शख्स ऑपरेशंस की कमान संभालेगा यह भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ विजन के साथ यह फैसला जुड़ता हुआ नजर आता है। आने वाले समय में Apple की मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक फैसले में सबीह खान की सोच भारत के लिए बड़ा असर डाल सकती है।

बड़ी कंपनियों की कमान संभाल रहे भारतीय मूल के टैलेंट

Google के सुंदर पिचाई, Microsoft के सत्या नडेला और अब Apple के सबीह खान… भारतीय मूल के टैलेंट एक-एक करके दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की कमान संभाल रहे हैं। यह सिर्फ भारत की शैक्षणिक क्षमता और मेहनत का नहीं, बल्कि संभावनाओं और भरोसे का प्रतीक है।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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