‘PoK खाली करे पाकिस्तान…’,

‘PoK खाली करे पाकिस्तान…’,

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आज कहा- जम्मू कश्मीर में तीसरा पक्ष दखल न दे भारत और पाकिस्तान सीजफायर के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से आज (13 मई) प्रेस कॉनफ्रेंस किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और गुलाम कश्मीर को लेकर भारत की नीति स्पष्ट है कि इस मुद्दे को दोनों देश मिलकर सुलझाएंगे। किसी भी तीसरे देश के दखल की जरूरत नहीं है।

ट्रम्प की कश्मीर पर टिप्पणी पर

हमारा लंबे अरसे से यही राष्ट्रीय पक्ष रहा है कि भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर से संबंधित किसी भी मुद्दे को भारत और पाकिस्तान को द्विपक्षीय तरीके से ही हल करना है। इस नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जैसा कि आप जानते हैं, लंबित मामला केवल पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्ज़ा किए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना है।

कार्रवाई रोकने और मध्यस्थता के दावों पर
दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच 10 मई 2025 को दोपहर 3:35 बजे हुई टेलीफोन बातचीत में समझौते की सटीक तिथि, समय और शब्दावली तय हुई। इस कॉल का अनुरोध पाकिस्तान उच्चायोग द्वारा विदेश मंत्रालय को 12:37 बजे भेजा गया था। तकनीकी कारणों से पाकिस्तानी पक्ष को भारतीय हॉटलाइन से जुड़ने में प्रारंभिक कठिनाइयाँ आईं। समय फिर भारतीय डीजीएमओ की उपलब्धता के अनुसार 3:35 बजे तय किया गया।

आप निश्चित रूप से समझ सकते हैं कि 10 मई की सुबह हमने पाकिस्तानी वायुसेना के प्रमुख ठिकानों पर एक अत्यंत प्रभावी हमला किया था। यही वह कारण था कि अब पाकिस्तान फायरिंग और सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार हुआ। स्पष्ट रूप से कह दूं—भारत की सैन्य शक्ति ही वह कारण थी जिसने पाकिस्तान को फायरिंग रोकने के लिए मजबूर किया।

जहाँ तक अन्य देशों से हुई बातचीत का सवाल है, भारत की ओर से संदेश स्पष्ट और सुसंगत था। जो बात सार्वजनिक मंचों पर कही गई, वही निजी बातचीत में भी दोहराई गई। वह यह कि भारत 22 अप्रैल के आतंकवादी हमले के जवाब में आतंकी ढांचे को निशाना बना रहा है। लेकिन यदि पाकिस्तानी सशस्त्र बल फायरिंग करते हैं, तो भारतीय बल भी जवाब देंगे; अगर पाकिस्तान रुकता है, तो भारत भी रुकेगा। यही संदेश पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के समय भी दिया गया था, जिसे उस समय पाकिस्तान ने नजरअंदाज किया। यह स्वाभाविक है कि कई विदेशी नेता, जिन्होंने भारत से यह बात सुनी, उन्होंने इसे अपने पाकिस्तानी समकक्षों से साझा किया।

सिंधु जल संधि पर

सिंधु जल संधि को इसकी प्रस्तावना में उल्लिखित सद्भावना और मित्रता की भावना के तहत संपन्न किया गया था। लेकिन पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर इन सिद्धांतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। अब 23 अप्रैल को हुई कैबिनेट की सुरक्षा समिति (CCS) के निर्णय के अनुसार, भारत इस संधि को तब तक स्थगित रखेगा जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से सीमा पार आतंकवाद का समर्थन छोड़ नहीं देता। कृपया यह भी ध्यान दें कि जलवायु परिवर्तन, जनसांख्यिकीय बदलाव और तकनीकी परिवर्तन ने ज़मीन पर नई वास्तविकताएं पैदा कर दी हैं।

ट्रम्प और व्यापार पर

7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को फायरिंग और सैन्य कार्रवाई बंद करने के समझौते तक, भारत और अमेरिका के नेताओं के बीच सैन्य स्थिति के विकास पर कई बातचीत हुई। इन चर्चाओं में व्यापार का मुद्दा कभी नहीं उठा।

पाक विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर
हमने पाकिस्तान की ओर से दिए गए बयान को देखा है। एक ऐसा देश जिसने आतंकवाद को औद्योगिक स्तर पर पाला-पोसा है, यदि यह सोचता है कि वह इसके परिणामों से बच जाएगा, तो वह स्वयं को मूर्ख बना रहा है। भारत द्वारा नष्ट किए गए आतंकवादी ढांचे न केवल भारतीयों की बल्कि दुनिया भर के कई निर्दोष लोगों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार थे। अब एक नया सामान्य बन चुका है। जितनी जल्दी पाकिस्तान इसे स्वीकार कर ले, उतना ही बेहतर होगा।

पाक विदेश मंत्री के CNN इंटरव्यू पर
पिछले सप्ताह ऑपरेशन सिंदूर के परिणाम स्वरूप पाकिस्तान ने बहावलपुर, मुरिदके, मुज़फ्फराबाद और अन्य स्थानों पर स्थित अपने आतंकवादी केंद्रों को नष्ट होते देखा है। इसके बाद, हमने उसकी सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया और प्रमुख वायुसेना अड्डों को प्रभावी रूप से निष्क्रिय कर दिया। यदि पाकिस्तानी विदेश मंत्री इन घटनाओं को अपनी उपलब्धियाँ बताना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने की पूरी स्वतंत्रता है।

जहाँ तक भारत का सवाल है, हमारा रुख शुरू से ही स्पष्ट और सुसंगत रहा है। हमारा लक्ष्य पाकिस्तान से संचालित हो रहे आतंकवादी ढांचे थे। अगर पाकिस्तानी सेना इसमें शामिल नहीं होती, तो कोई समस्या नहीं होती। लेकिन यदि उन्होंने हम पर फायरिंग की, तो हमने उपयुक्त जवाब दिया। 9 मई की रात तक पाकिस्तान भारत को बड़े हमले की धमकी दे रहा था। लेकिन 10 मई की सुबह उनका प्रयास विफल हुआ और उन्हें भारत की जबरदस्त जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। इसके बाद ही उनका सुर बदला और उनके डीजीएमओ ने हमसे संपर्क किया। मूल रूप से, भारत का रुख शुरू से एक जैसा रहा; पाकिस्तान का रुख 10 मई की सुबह बदल गया, जब उसके वायुसेना अड्डे प्रभावी रूप से निष्क्रिय हो गए। बस यह देख लीजिए कि गोलीबारी रोकने की शर्तों पर बातचीत के लिए किसने किसे कॉल किया।

वैसे आप सभी जानते हैं कि उपग्रह चित्र अब वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध हैं। मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि पाकिस्तान जिन स्थलों पर हमले का दावा कर रहा है, उन्हें देखें। फिर उनकी तुलना उन स्थानों से करें जिन्हें भारत ने सफलतापूर्वक निशाना बनाकर नष्ट किया। इससे आपको पूरी तस्वीर साफ़ समझ में आ जाएगी।

ट्रम्प के परमाणु युद्ध की अटकलों पर
सारी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह पारंपरिक (कन्वेंशनल) दायरे में रही। ऐसी कुछ रिपोर्टें आई थीं कि पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी की बैठक 10 मई को होगी, लेकिन बाद में पाकिस्तान ने स्वयं इसे खारिज कर दिया। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने भी सार्वजनिक रूप से परमाणु कोण से इंकार किया है।

भारत का स्पष्ट और दृढ़ रुख है कि वह किसी भी प्रकार की परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा और न ही इसकी आड़ में की जाने वाली सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त करेगा। विभिन्न देशों के साथ बातचीत में हमने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की अटकलों का समर्थन उनके अपने क्षेत्रीय हितों को भी नुकसान पहुँचा सकता है।

आवामी लीग पर प्रतिबंध
बिना विधिक प्रक्रिया के आवामी लीग पर लगाया गया प्रतिबंध एक चिंताजनक विकास है। एक लोकतंत्र के रूप में, भारत को लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं के हनन और राजनीतिक क्षेत्र के सिमटने पर स्वाभाविक रूप से चिंता है। हम बांग्लादेश में शीघ्र, स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनावों के आयोजन का प्रबल समर्थन करते हैं।

भारत-पाकिस्तान को एक साथ जोड़ने (हाइफ़नेशन) पर

इसके विपरीत दुनिया भर में यह व्यापक समझ है कि पहलगाम में भारतीय पर्यटक आतंकवाद के शिकार बने और आतंकवाद का केंद्र पाकिस्तान की सीमा पार स्थित है। कई विदेशी नेताओं ने भारतीय समकक्षों से बातचीत में भारत के आत्मरक्षा और अपने नागरिकों की सुरक्षा के अधिकार को स्वीकार किया। मैं आपका ध्यान 25 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रेस वक्तव्य की ओर भी आकर्षित करना चाहता हूँ, जिसमें कहा गया है कि “इस घृणित आतंकवादी कृत्य के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने ज़ोर दिया कि इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

रूस-यूक्रेन संघर्ष पर
भारत रूस द्वारा यूक्रेन के साथ प्रत्यक्ष बातचीत की पेशकश का स्वागत करता है। वार्ताएँ दोनों पक्षों को अपने मुद्दों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने का अवसर प्रदान करती हैं। भारत ने लगातार इस बात की वकालत की है कि रूस और यूक्रेन के बीच ईमानदारी और व्यावहारिकता पर आधारित संवाद आवश्यक है ताकि शीघ्र और टिकाऊ शांति सुनिश्चित की जा सके।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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