कोयलानगरी धनबाद में ठाकुरों के बीच खूनी जंग का अंतहीन सिलसिला…NEWS ANP विशेष रिपोर्ट

धनबाद (DHANBAD)विश्व के मानचित्र पर परचम लहराने वाला झरिया कोलफील्ड्स झारखंड के धनबाद में फैला हुआ है। कोयला के अंगारों के बीच यहां खून के फुहारे छूटते रहते हैं।खास बात यह है कि यहां ठाकुर घराने का राज चलता रहा है।अब तक ठाकुर खुद आपस लड़ने झगड़ते रहें हैं। ठाकुर अपनों के खून के प्यासे हो गए हैं। सौगंध-कसमें खा ली तो फिर”रघुकुल रीति सदा चली आई ,प्राण जाई पर वचन न जाई “। कुछ भी हो सकता है,ये किसी भी हद तक जा सकते हैं..


बेताज बादशाह, पहलवान जी , विधायक जी और माफिया के नाम से प्रसिद्ध सूर्यदेव सिंह का कोलफील्ड्स से नाता मात्र 30 वर्षों का रहा। इस दौरान वे झरिया से कई बार विधायक भी बने। उनके जीते जी उस परिवार को जानमाल की कोई क्षति कभी नहीं हुई..

वे वर्ष 1991 में मात्र 51 वर्ष की उम्र में चल बसे। लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उनके बड़े पुत्र राजीव रंजन की कथित तौर पर लिलुआ में हत्या कर दी गयी। इसकी साजिश स्व सुरेश सिंह ने रची और डॉन बृजेश ने उसे तमाम कर दिया। इस हत्या को चतुराई से अंजाम देने के लिए डॉन के रिश्तेदार प्रमोद सिंह की सुरेश सिंह ने हत्या कराई और डॉन को बरगलाया गया कि ये हत्या मेंशन वालों की करामत है। 3 अक्टूबर 2003 को प्रमोद सिंह की गोली मारकर बीएम अग्रवाला कालोनी में हत्या की गई और उसी दिन से राजीव रंजन लापता हो गए। दो दशक बाद उन्हें कोर्ट ने मृत घोषित किया..


इसके बाद संजय सिंह, विनोद सिंह,सकलदेव सिंह, सुरेश सिंह भी मारकाट में हत्या की कड़ी में शामिल हो गए। सबसे पहले संजय सिंह की हत्या उसी के मित्र सुरेश सिंह ने वर्ष 1996 में धनबाद एसएसपी ऑफिस के सामने करी थी। हालांकि संजय को अन्यत्र मारकर उसे एसपी कोठी के सामने अमलीजामा पहनाने का ड्रामा किया गया था। इसी कड़ी में सबसे पहले सुरेश के साले बिनोद सिंह को 1996 में कतरास के भगत सिंह चौक में गोलियों से भुना गया। बिनोद सिंह के मामले में सिंह मेंशन को जिम्मेदार ठहराया गया था। कोर्ट में मामले की पैरवी बिनोद के बड़े भाई सकलदेव सिंह कर रहे थे। वर्ष 1998 में भूली के पास हीरक रोड पर उन्हें और उनके जिप्सी चालक मनोज की भी कहानी प्लेन कर दी गयी..हालांकि 27पहले के इस मामले में आरोपी बरी हो चुके है..

वर्ष 2011 में बिनोद और सकलदेव सिंह के बहनोई सुरेश सिंह को धनबाद क्लब की एक पार्टी में शशि सिंह ने सरेआम मौत की नींद सुला दी । फिर पूर्व डिप्टी मेयर सह कांग्रेस नेता नीरज सिंह को मौत के घाट उतार दिया गया।इस केस में नीरज का चचेरा भाई सह पूर्व विधायक आरोपी हैं,जो जेल में कैद हैं। इसी कड़ी के एक अहम किरदार अमन सिंह की हाल ही में जेल के भीतर छलनी कर दी गई, ये नीरज को शूट करने वालों में से एक था।मारे गए ये सारे लोग ठाकुर थे..

सवाल है कि अमन की हत्या के बाद क्या ठाकुरों के बीच नफ़रत की आग बुझ जाएगी या आगे भी किसी ठाकुर के दिल की धड़कनें बंद होगी, पता नहीं कहां, कब और किसका विकेट गिर जाए, ये गंभीर सवाल है…


मालूम हो कि यूपी के पूर्वांचल में 1990 के दशक में विधायक नित्यानंद राय और कुख्यात मुख्तार अंसारी के बीच गैंगवार चला था। एक एक कर सब साफ हो गए। सवाल है कि यहां ठाकुरों के मध्य चल रहे खूनी खेल का खात्मा आखिर कब होगा? अब स्व. रामनाथ सिंह सरीखे लोग समाज में कहां बचे हैं जो घरों के बीच खड़ी हो रही नफरत की दीवारों को सदा के लिए बंद करने का माद्दा रखता हो। जिन्होंने मध्यस्थता कर कइयों के बीच खाई को पाटकर प्रेम के पौधे उगाए, नए सिरे से जीवन दिया..

एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बने कई घरानों के बीच शादी के रिश्ते जोड़कर उन्होंने नफरत की अंदर अंदर सुलगती आग को बुझाया और प्रेम के दीपक जलाए । धनबाद को फिर एक रामनाथ बाबू की जरूरत है..

NEWS ANP के लिए वरीय पत्रकार अमर तिवारी के साथ कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट..

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