“सिया” का गठन के अभाव में झारखंड में सभी बालू घाटों की नीलामी की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी…

रांची (RANCHI) सूबे में यह चिंताजनक है कि झारखंड सरकार (Jharkhand Government) के तमाम प्रयासों के बावजूद राज्य में बालू घाटों (Sand Ghats) की नीलामी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।

राज्य में अभी तक राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) का गठन नहीं हो सका है।

राज्य में केवल 21 बालू घाट ही चल रहे

इससे पिछले चार सालों से राज्य में अधिकृत रूप से केवल 21 बालू घाट ही चल रहे हैं, जबकि राज्य में राज्य में श्रेणी-2 के तहत कुल 444 बालू घाट हैं।

इससे राज्य के सभी जिलों में बालू (Sand) की किल्लत अभी भी जारी रहेगी। इससे निर्माण कार्य पर भी बड़ा असर पड़ेगा।

बता दें कि बालू घाटों के संचालन के लिए अंतिम स्तर पर राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) से अनुमति जरूरी है। पिछले साल नवंबर 2023 से ही राज्य में सिया भंग है।

इसके पुनर्गठन को 6 नवंबर 2023 को झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड (JSMDC) द्वारा एक प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय (MOEFCC) को भेजा गया था। लेकिन इस पर कोई निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है।

सिया नहीं होने से टेंडर हुए बालू घाटों को पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं
JSMDC से मिली जानकारी के मुताबिक फरवरी के पहले हफ्ते तक कुल 444 बालू घाटों में 323 का ही जिला स्तर पर टेंडर निकला गया था। इनमें से 216 की टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई।

प्रदेश में नदियों से बालू खनन का कार्य प्रारंभ करने के लिए सरकारी बंदोबस्त धारियों को सिया की अनुमति सबसे पहले लेनी होती है। सिया नहीं होने से Tender हुए बालू घाटों को पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल पा रही है।

अगर सारी प्रक्रिया पूरी हो जाती तो जहां आम लोगों को बालू की उपलब्धता में बढ़ोतरी होती, वहीं सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त हो सकेगा।

बालू घाटों की टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के सीएम की कोशिश पर भी ब्रेक
बता दें कि राज्य में सरकारी स्तर पर घाट से 7.5 रुपए प्रति CFT (Cubic Feet) की दर से बालू मिलता है। अमूमन एक ट्रैक्टर में 100 सीएफटी बालू आता है। इस हिसाब से यह राशि 750 रुपए होती है।

इसमें पांच फीसदी GST जुड़ता है। इस तरह कुल दर 787 रुपए होती है। आम लोगों तक बालू पहुंचाने में अगर 1000 रुपए भी ढुलाई का भार मानें तो यह दर 1800 के आसपास पड़ती है। इसके बावजूद बालू घाटों की टेंडर नहीं होने से लोगों को कालाबाजारी में बालू खरीदना पड़ रहा है।

यह स्थिति तब है कि जब सूबे के मुखिया चंपाई सोरेन भी आम लोगों को सरकारी दर पर बालू दिलाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। उनके इस कोशिश पर ब्रेक लगा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया था कि राज्य में बालू घाटों के टेंडर की प्रक्रिया में अधिकारी तेजी लाएं। पिछले माह उन्होंने बालू घाटों की समीक्षा में कहा था कि श्रेणी-1 के कुल घाटों में से चिह्नित 369 बालू घाटों को ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित करने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की दिशा में काम करें। समस्या का समाधान जल्द करें।

NEWS ANP के लिए कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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