हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जयंती(Hanuman jayanti) मनाई जाती है, जिसे हनुमान जन्मोत्सव भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान आज भी अपने भक्तों की रक्षा के लिये पृथ्वी पर मौजूद हैं। यही वजह है कि इस दिन देशभर के हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आयोजन किये जाते हैं। इस शुभ अवसर पर भक्त प्रभु को सिंदूर, बूंदी, चोला और बेसन के लड्डू का भोग लगाते हैं।
मान्यता है कि इससे जीवन के भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और साहस, शक्ति तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 1 अप्रैल की सुबह 7.06 बजे होगी, वहीं, 2 अप्रैल सुबह 7.41 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जायेगी। उदया तिथि के आधार पर हनुमान जयंती का पर्व 2 अप्रैल को मनाया जायेगा।
इस वर्ष हनुमान जयंती(Hanuman jayanti) पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जैसे Hasta Nakshatra शाम 5.38 बजे तक रहेगा। Dhruva Yoga का भी संयोग बनेगा। इसी दिन Mars का Pisces राशि में गोचर होगा। ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को भगवान हनुमान से जुड़ा माना जाता है, इसलिये यह संयोग विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
हनुमान जयंती(Hanuman jayanti) की पूजा विधि
सबसे पहले पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर लाल रंग का स्वच्छ वस्त्र बिछायें।
चौकी पर भगवान हनुमान की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
भगवान को सिंदूर, फूलों की माला अर्पित करें।
धूप और दीप जलाकर बूंदी का भोग लगायें।
बेसन के लड्डू चढ़ाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
इसके बाद श्रद्धा भाव से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
गुड़-चना और पान का बीड़ा अर्पित करें।
अंत में आरती कर प्रसाद का वितरण करें।
हनुमान जी के मंत्र
ॐ नमो भगवते हनुमते नमः
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्
इन मंत्रों का जप करने से भक्तों को साहस, बल और संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

