नई दिल्ली:(Newdelhi): केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज बुधवार को संसद में चार अहम बिल पेश किए हैं. जिनका सदन में विपक्ष की जोरदार से विरोध हो रहा है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किए. जिस पर सदन में खूब हंगामा हो रहा है. सरकार ने गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए जाने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री या मंत्री को पद से हटाने का प्रावधान करने के लिए बुधवार को संसद में चार बिल पेश किए. लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिलों को पेश किया. शाह ने केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025, संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 बिल को लोकसभा के पटल पर रखा. विपक्षी सांसदों ने इसका पुरजोर विरोध किया. कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संविधान विरोधी बताया. गृह मंत्री कहा कि यह बिल जल्दबाजी में लाने का आरोप सही नहीं है. उन्होंने कहा बिल को संयुक्त समिति को सौंपा जाएगा. सभी पक्ष-विपक्ष के सांसदों की समिति इस पर विचार करेगी और आपके सामने लेकर आएगी.
सरकार के महत्वपूर्ण विधेयक में पहला है प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को गिरफ्तार होने पर पद से हटना होगा।
लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 पेश किया। इस बिल में मुख्यमंत्री, राज्यों के मंत्री के इस्तीफे का प्रावधान है। इस बिल के तहत प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री अगर गिरफ्तार होते हैं तो उन्हें पद से हटना होगा। वहीं ये नियम केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद भी लागू होगा। सीरियस क्रिमिनल चार्ज में डिटेन होने पर भी उन्हें पद से हटाया जाएगा।
जानिए..संसद में आज कौन-कौन से बिल पेश हुए ..?
- 130वां संविधान संशोधन बिल 2025
- केंद्र शासित प्रदेश संशोधन बिल 2025
- जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025
- द प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025
गिरफ्तारी के बाद इस्तीफा जरूरी क्यों होना चाहिए?
वजह नं. 1- निष्पक्ष जांच हो सके।
वजह नं. 2- जांच एजेंसी/अधिकारी पर दबाव ना बना सके।
वजह नं. 3- गवाहों को प्रभावित ना किया जा सके।
वजह नं. 4- साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश ना हो।
हाल ही में चर्चा में रहे ये मामले
बता दें कि हाल ही में जांच एंजेसियों ने कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया था। लेकिन इनमें एक मुख्यमंत्री ने गिरफ्तारी के बावजूद इस्तीफा नहीं दिया था। दरअसल प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली के तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल को एक मामले में गिरफ्तार किया था लेकिन उन्होंने जेल जाने के बावजूद अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था।
वहीं ED ने झारखंड के तत्कालीन सीएम हेमंत सोरेन को भी एक मामले में गिरफ्तार किया था लेकिन उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी गिरफ्तार हो चुके हैं। ऐसे में अगर नया विधेयक पास हो जाता है तो इसका सीधा मतलब होगा कि पद पर बैठे नेता को कुर्सी छोड़नी होगी।
NEWS ANP के नई दिल्ली से ब्यूरो रिपोर्ट

