नई दिल्ली(NEW DELHI): सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ से एक वकील की बीकॉम की डिग्री की जांच करने का निर्देश दिया है। शीर्ष न्यायालय ने यह आदेश तब दिया, जब बिहार के मगध विश्वविद्यालय ने दावा किया कि अधिवक्ता की डिग्री जाली है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुईयां की पीठ ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) की अनुशासन समिति के फैसले के खिलाफ अधिवक्ता की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश मगध विश्वविद्यालय की वर्ष 1991 में बीकॉम परीक्षा उत्तीर्ण करने की डिग्री की सीबीआइ जांच के आदेश दिए। इसके लिए पीठ ने सीबीआइ निदेशक को एक अधिकारी नियुक्त करने और तीन नवंबर तक या उससे पहले जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
मगध विश्वविद्यालय ने कहा- डिग्री और मार्कशीट जाली
इस मामले में मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के परीक्षा नियंत्रक की ओर से सुप्रीम कोर्ट को भेजे एक पत्र में कहा गया कि अधिवक्ता की मार्कशीट और बीकॉम की डिग्री जाली है, विश्वविद्यालय द्वारा जारी नहीं की गई है। इसके बाद कोर्ट ने वकील को उन डिग्रियों की फोटोकॉपी पेश करने का निर्देश दिया, जिनमें उसने कॉमर्स और कानून में स्नातक होने का दावा किया था।
कोर्ट के आदेश पर अधिवक्ता ने डिग्री की एक फोटोकॉपी पेश की। संबंधित अधिवक्ता की ओर से दावा किया गया कि विश्वविद्यालय के रिकार्ड फाड़ दिए गए हैं और इसलिए, उपलब्ध दस्तावेजों से डिग्री की पुष्टि संभव नहीं हो सकती है। पीठ ने सीबीआइ को इस मामले में तीन नवंबर तक या उससे पहले रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

