बिहार(BIHAR):बिहार की राजनीति में एक बार फिर प्रदर्शन और सामाजिक समीकरणों के बीच टकराव साफ नजर आ रहा है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री के रूप में विजय कुमार सिन्हा ने जिस तरह काम किया, उसने उन्हें एक मजबूत और ईमानदार छवि वाले नेता के तौर पर स्थापित किया। भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई ने जनता के बीच उनकी अलग पहचान बनाई।
लेकिन राजनीति सिर्फ काम के दम पर नहीं चलती—यहां जातीय समीकरण भी उतने ही अहम होते हैं। चाहे कितनी भी प्रगतिशील बातें क्यों न की जाएं, जमीनी हकीकत यही है कि जातिवाद आज भी राजनीति का बड़ा आधार बना हुआ है।
साल 2025 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी सरकार में अगर किसी मंत्री की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, तो वो विजय कुमार सिन्हा ही थे। लेकिन अब सवाल यह है कि इतनी मजबूत परफॉर्मेंस के बावजूद उनका अगला कदम क्या होगा?
डिप्टी सीएम की सीट पहले से ही भरी हुई बताई जा रही है, ऐसे में उनके सामने विकल्प सीमित नजर आते हैं। क्या वे फिर से मंत्री पद संभालेंगे या उन्हें कैबिनेट से बाहर रखा जाएगा—यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।
बिहार की राजनीति में यह मामला एक बार फिर इस बहस को तेज करता है कि क्या केवल अच्छा काम ही आगे बढ़ने के लिए काफी है, या फिर सामाजिक और जातीय समीकरण ही अंतिम फैसला करते हैं।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

