बिहार (BIHAR), भूमि रिकॉर्ड अपडेट करना नीतीश सरकार के वश का नहीं है। क्या करना, कैसे करना, और कब करना, इसका प्राथमिक ज्ञान सरकार चलानेवाले और उनके अफसरों के पास नहीं है। जब प्रारंभिक ज्ञान ही नहीं है काम अंजाम तक कैसे पहुंचेगा?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह प्रबल इच्छा रही है कि बिहार में भूमि सुधार हो और दस्तावेजों को अपडेट कर उसे डिजिटाइज किया जाए। लेकिन वे निहित स्वार्थवालों से इस कदर घिरे हुए हैं कि अपना सपना पूरा नहीं कर पा रहे। थोड़े से दबाव में सरेंडर कर देते हैं।
2006 में उन्होंने पश्चिम बंगाल के चर्चित अधिकारी डी बंदोपाध्याय की अध्यक्षता में भूमि सुधार के लिए समिति की थी।समिति ने 2008 में अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन विरोध की आशंका से उसे लागू करना तो दूर सार्वजनिक तक नहीं किया गया।
फिर अभी 2024 से भूमि सुधार का नया अभियान चला। बिना मुकाम तक पहुंचे बीच में ही वह ठहर सा गया। जितने अमीन या शिविर प्रभारी बहाल किए गए थे, उनमें से अधिकांश नौकरी छोड़ गए।
अब फिर 16 अगस्त से भूमि रेकॉर्ड को अपडेट करने, जमाबंदी में सुधार करने, नाम अपडेट करने और सारे रिकॉर्ड को ऑन लाइन करने के लिए राजस्व महाअभियान शुरू किया गया है।पहल अच्छी है, लेकिन पर्याप्त होमवर्क नहीं किया गया है।
राज्यव्यापी अभियान के लिए अपनी क्षमता का आंकलन करना जरूरी था, लेकिन नहीं हुआ। तय मानिए कि इसका हश्र भी ढाक के तीन पात वाला होने जा रहा है।
कुछ माह पूर्व तक मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों के कार्यों की खूब समीक्षा किया करते थे, लेकिन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कार्यों की समीक्षा करते उन्हें शायद ही कभी देखा सुना गया।
हां यह जरूर है कि इन अभियानों के नाम पर सीओ, कर्मचारी, अमीन, डीसीएलआर आदि की भरपूर कमाई हुई। कमाई इतनी हुई है कि उनकी कई पीढ़ियां बैठ कर खा सकती हैं।
सरकार जब अपना बुद्धि विवेक खो देती है तो यही होता है जो अभी हो रहा है।
मैं फिर कहूंगा कि नीतीश जी की सोच अच्छी है। उन्होंने समस्या की जड़ पकड़ी है लेकिन डट कर उसका समाधान निकालने में वे विफल हो रहे हैं। भ्रष्ट नौकरशाही उन्हें नाकाम करा रही है। यह उन्हें समझना होगा।
NEWS ANP के लिए पटना ब्यूरो रिपोर्ट

