बिहार(BIHAR): बिहार सरकार ने तेजी से बढ़ते साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। गृह विभाग ने 14 करोड़ 74 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है, जिसके जरिए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के तहत सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा और चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।
एडीजी ने बताए सेंटर के फायदे
एडीजी (ईओयू) नैयर हसनैन खान ने पटना में प्रेस वार्ता कर बताया कि यह केंद्र साइबर अपराध से निपटने और संबंधित मामलों का त्वरित निष्पादन करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और उपकरण खरीदे जाएंगे।
साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी से बड़ा खुलासा
ईओयू ने हाल ही में मधेपुरा जिले से तीन साइबर अपराधियों—रामप्रवेश कुमार, विकास कुमार और मिथिलेश कुमार—को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि इन लोगों ने यू-ट्यूब और गूगल से फर्जीवाड़ा सीखा। आरोपी आधार डेटा और बायोमेट्रिक चुराकर फिंगर प्रिंट सिलिकॉन से ठगी कर रहे थे। इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों और सीडैक की मदद से जारी है।
भ्रष्ट लोकसेवकों पर गिरी गाज
ईओयू ने भ्रष्टाचार मामलों में भी कार्रवाई की है। भागलपुर के जिला अवर निबंधक विनय सौरभ और मधुबनी ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार राय के खिलाफ disproportionate assets (डीए) मामले में बड़ा खुलासा हुआ। राय के घर से बड़ी मात्रा में भारतीय करेंसी और जले हुए नोट बरामद किए गए। उन्हें जेल भेजा जा चुका है, जबकि उनकी पत्नी की तलाश जारी है।
विधायकों की खरीद-फरोख्त की जांच
एडीजी ने बताया कि विधायक खरीद-फरोख्त मामले में अब तक 5 विधायकों और 6 राजनीतिक कार्यकर्ताओं से पूछताछ हो चुकी है। इसमें 9 विधायकों के अंगरक्षक भी शामिल हैं। जांच फिलहाल जारी है।
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

