बिहार(BIHAR): बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 121 सीटों पर किस्मत आजमाने ऐसे 242 चेहरे उतर चुके हैं, जिनके पीछे बस जात-पात नहीं, बल्कि उम्मीदों, सपनों और संघर्षों की दास्तानें हैं। कोई कोर्टरूम से राजनीति में आया वकील है,तो कोई स्टेथोस्कोप छोड़ अब जनता की नब्ज टटोल रहा डॉक्टर। कहीं इंजीनियर ने वोटों का गणित संभाला है, तो कहीं PHD धारक उम्मीदों का नया अध्याय लिखने निकला है। सबसे ज्यादा 17 उम्मीदवार कानून के धुरंधर हैं, 13 इंजीनियर, 5 डॉक्टर, 12 PHED, 3 MBA यानि यह लड़ाई अब सिर्फ जातीय समीकरणों की नहीं, बल्कि बौद्धिक मुकाबले की भी है। कहीं 70 हजार की संपत्ति वाला आम उम्मीदवार, तो कहीं 70 करोड़ के मालिक नेता, बिहार की सियासत में यह अमीरी-गरीबी का अंतर मानो एक ही मंच पर दो अलग दुनिया की झलक दे रहा है। NDA और महागठबंधन, दोनों ने अपने परंपरागत वोटरों को साधने की पुरजोर कोशिश की है, दिलचस्प बात यह है कि नालंदा के श्रवण कुमार 66 की उम्र में भी धरती की गंध नहीं भूले, बिहारशरीफ के डॉ. सुनील कुमार, कुशवाहा समाज के डॉक्टर नेता, बिक्रम के सिद्धार्थ सौरभ युवा ऊर्जा का प्रतीक और राघोपुर में फिर वही नाम, तेजस्वी यादव, जो कहते हैं, “अब राजनीति में रोजगार और सम्मान दोनों चाहिये।” कहीं महुआ की गलियों में तेजप्रताप का जुलूस, तो कहीं मोकामा में अनंत सिंह की दहाड़, हर सीट एक कहानी है, हर उम्मीदवार एक किरदार।
NEWSANP के लिए बिहार से ब्यूरो रिपोर्ट

