बंगाल में लहराया भगवा, ममता दीदी का साम्राज्य समाप्त…

बंगाल में लहराया भगवा, ममता दीदी का साम्राज्य समाप्त…

शिवपुजन सिंह /वरिष्ठ पत्रकार

रांची(RANCHI): सियासत में सत्ता का खेल और इस दरमियान हुकूमत की हनक देखने लायक होती है. बंगाल में सीपीआईएम का 32 सालों का साम्राज्य क़ो साफ. आज से डेढ़ दशक पहले ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस नें किया था, तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु क़ो सिहासन से उतरना उतना आसान नहीं था, एकछत्र राज्य बसु बाबू का था, लेकिन उनकी सल्तनत पर कब्ज़ा ममता बनर्जी नें किया, उसने बंगाल में वह कर दिखाया, जिसकी दाद और बहादुरी आज तक की जाती है. अपनी बेबाकी और चिल्लाहट से शेरनी की अक्स दीदी का था. बंगाल में एक़ पत्ता भी उनके इशारे पर नहीं हिलता था.
ममता नें अपनी सत्ता चलाई तो वही अंदाज, गर्जना,धौंस, धमक और धमकी वाला था. लेकिन 4 मई 2026 क़ो दीदी की आवाज मंद पड़ गई, उनका शासन और सिहासन डोलकर समाप्त हो गया. भारतीय जनता पार्टी नें प्रचंड बहुमत से बंगाल के सिहासन पर दावा ठोका. हालांकि अंदाजा और आकलन नहीं था कि भारी बहुमत से भगवा लहराएगी, लेकिन भाजपा ने ममता सरकार के करनामों की परत दर परत खोलकर रख थी. राज्य में भ्रष्टाचार के चल रहें दीमक, तुष्टिकरण की राजनीति, बांग्लादेशी घुसपेठ, टीएमसी कार्यकर्त्ताओं की गुंडागर्दी क़ो चुनावी मुद्दा बनाकर तफ़सील और अच्छे से कैंपन कर भुनाया.

ममता बनर्जी की बंगाल की सत्ता से बेदख़ली के बाद उनकी वापसी उतनी आसान नहीं होंगी. इसके पीछे वजह उनकी बढ़ती उम्र, तृणमूल में उनके सिवा क़ो बड़ा चेहरा नहीं होना, साथ ही समय के साथ संगठन का कमजोर होना.
इधर भाजपा का उदय बंगाल में एक़ करिश्मा, जमीनी मेहनत और जिजीविषा क़ो दर्शाती है. इसके लिए बीजेपी कार्यकर्त्ताओं के खून बहे और जान से भी हाथ धोना पड़ा. टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्त्ताओं की भिड़ंत अक्सर होते रहती थी.

भाजपा का 2016 के पहले तो बंगाल में कोई नामोनिशान तक नहीं था. एक़ भी विधायक विधानसभा में जीतकर नहीं आया था. शुरुआत 2016 के विधानसभा चुनाव में हुई, जब 3 विधायक जीतकर आये, फिर 2021 में इसकी संख्या 77 पहुंची और 2026 में तो इतिहास ही रच दिया और बंगाल की सत्ता पर कब्ज़ा जमा लिया. पिछले दस सालों में ही भारतीय जनता पार्टी नें बंगाल पर शासन करने का अपना सपना पूरा कर लिया.

यह याद रखने वली और पिछले पन्ने पलटकर गौर से पढने वाली बात है. भाजपा का शासन जहां भी जिस राज्य में है.वहा सत्ता में आने के बाद फिर वह जम जाती है. बंगाल से सटे असम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, बिहार इसका अच्छा उदाहरण है. लिहाजा बंगाल में आने के बाद उम्मीद है कि लम्बे समय तक सत्ता में दखल रखेगी.

वैसे भी 6 अप्रैल 1980 में भाजपा के उदय के बाद इसका उभार और फैलाव बढ़ता ही गया . अभी बंगाल, असम और पूंदुचेरी में जीत के बाद 22 राज्यों में भाजपा का शासन है, वही देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का भाजपा के आने के बाद सिकुड़ती ही चली जा रही है.

फिलहाल पांच राज्यों के चुनाव परिणाम में बंगाल के रिजल्ट पर सबसे ज्यादा नजर थी. जहां एकबार फिर साफ हो गया कि जनता ही सबसे बड़ी मालिक इस लोकतंत्र की है. देश की आजादी के बाद बंगाल में कांग्रेस, सीपीआईएम, तृणमूल कांग्रेस और अब बीजेपी का शासन आना इसका सबूत है.

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