फांसी की सजा के बावजूद कैसे बरी हुआ सुरेंद्र कोली? खौफनाक ‘निठारी कांड’ में कब क्या-क्या हुआ? पूरी कहानी

फांसी की सजा के बावजूद कैसे बरी हुआ सुरेंद्र कोली? खौफनाक ‘निठारी कांड’ में कब क्या-क्या हुआ? पूरी कहानी

साल 2006 के चर्चित निठारी सीरियल मर्डर केस के आरोपी सुरिंदर कोली, जिसे 13 हत्याओं में दोषी ठहराकर फांसी की सजा दी गई थी, अब 19 साल बाद जेल से रिहा होने वाला है। दो बार फांसी के बिल्कुल करीब पहुंच चुके कोली को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से बरी होने का आदेश मिल गया है। बता दें कि कोली को ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने बरकरार रखा था। लेकिन अंतिम न्यायिक उपाय ‘क्यूरेटिव पिटीशन’ के ज़रिए उसे राहत मिल गई।

ध्यान देने वाली बात है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहले ही 12 मामलों में सुरिंदर कोली को बरी कर दिया था। केवल रिम्पा हलदार हत्याकांड बचा था, जिसमें 2015 में हाईकोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। अब 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में भी उसे बरी करने का आदेश दिया, जिससे कोली की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

निठारी कांड के 13 मुकदमों की पूरी कहानी

साल 2006 में सामने आए निठारी हत्याकांड में 5 से 25 साल की उम्र की 13 बच्चियों और युवतियों की हत्या का आरोप कोली पर लगा था। ट्रायल कोर्ट ने हर मामले में फांसी की सजा सुनाई, लेकिन 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकांश मामलों में साक्ष्य की कमी बताते हुए उसे बरी कर दिया।

रिम्पा हलदार केस (14 वर्ष की लड़की की हत्या):

  • ट्रायल कोर्ट (13 फरवरी 2009): फांसी
  • हाईकोर्ट (11 सितंबर 2009): उम्रकैद
  • सुप्रीम कोर्ट (11 नवंबर 2025): बरी

बाकी 12 मामलों में भी अदालत ने कहा कि CBI की जांच में कई गंभीर खामियां थीं, जिसके चलते सजा टिक नहीं पाई।

कौन है सुरिंदर कोली?

  • जन्म: 1970, अल्मोड़ा (उत्तराखंड)
  • परिवार: 1998 में शांति देवी से शादी, दो बच्चे
  • 2003: नोएडा आया नौकरी की तलाश में
  • 2005–2006: व्यापारी मोनिंदर सिंह पंधेर के घर में घरेलू सहायक के रूप में काम किया।

दिसंबर 2006: निठारी हत्याकांड में गिरफ्तार

  • इस केस ने पूरे देश को झकझोर दिया था। कोली पर हत्या के अलावा कैनिबलिज़्म (मानव-मांस खाने) और नेक्रोफिलिया (लाशों से यौन शोषण) जैसे घिनौने आरोप लगे थे।

जेल में 19 साल: एक अपराधी से ‘शांत कैदी’ तक

  • गाजियाबाद की जेल में शुरुआती साल उसके लिए बेहद कठिन रहे। दूसरे कैदी उसे ताने मारते थे, जिससे उसका व्यवहार हिंसक और गुस्से से भरा रहता था।
  • एक जेलर ने याद किया — “वह हमेशा गुस्से में रहता, आदेश मानने से इंकार करता। उसे संभालना मुश्किल था।”
  • धीरे-धीरे कोली बदलने लगा। सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के बाद उसका रवैया एकदम शांत हो गया। अब वह रोज प्रार्थना करता है और ध्यान लगाता है — जो पहले कभी नहीं करता था। जेल अधिकारियों का कहना है कि अब वह “शांत, संयमी और उम्मीद से भरा हुआ” दिखता है।

जेल में काम और दिनचर्या

  • 2023 में उसे ग्रेटर नोएडा जेल में शिफ्ट किया गया, जहां उसे जेल गार्ड की जिम्मेदारी दी गई। वह कैदियों पर नजर रखता था और खाने की व्यवस्था संभालता था। उसने छह महीनों में 10,000 रुपये की मजदूरी कमाई, जो जेल में उसकी जिंदगी की पहली कमाई रही।
  • उसकी कानूनी फाइलें करीब 20 किलो वज़नी हैं, जो वह अपने बिस्तर के पास रखता है, लेकिन अब उन्हें शायद ही खोलता है। 2023 से उसने सिर्फ दो खत लिखे — एक में पुराने कपड़े मंगवाने की बात और दूसरे में मनी ऑर्डर से जुड़ा अनुरोध।
  • परिवार से उसका संपर्क लगभग खत्म हो गया है। केवल सुप्रीम कोर्ट के वकील और उसका बेटा रुद्र प्रताप (2022 में) उससे मिलने आए थे.

यहां जानें कब-कब क्या हुआ

  • 29 दिसंबर 2006: निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले। मालिक मनिंदर सिंह पंधेर और उसका नौकर सुरेंद्र कोली गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की।
  • 11 जनवरी 2007: मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई। सीबीआई का पहला दल निठारी पहुंचा। कोठी के पास से 30 और हड्डियां बरामद कीं।
  • 22 मई 2007 : सीबीआइ ने गाजियाबाद की अदालत में मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। मोनिंदर सिंह पंधेर पर हल्के आरोप लगाए गए। कोली पर दुष्कर्म, अपहरण और हत्या के आरोप लगाए गए।
  • 13 फरवरी 2009: निठारी में सिलसिलेवार 19 हत्याओं में से एक 14 वर्षीय रिम्पा हालदार के साथ रेप और उसकी हत्या के लिए विशेष अदालत ने पंधेर तथा कोली को मौत की सजा सुनाई।
  • 11 सितंबर 2009 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को सुनाई गई मौत की सजा से बरी किया।
  • 20 जुलाई 2014: सुरेंद्र कोली की दया याचिका राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दी।
  • 08 सितंबर 2014 : कोर्ट ने रात एक बजे कोली की फांसी पर रोक लगा दी, कोली की सजा उसी दिन होनी थी।
  • 24 जुलाई 2017: कोली और पंधेर को 20 वर्ष पिंकी सरकार की हत्या और बलात्कार के प्रयास में सीबीआई अदालत ने दोषी ठहराया। दोनों के खिलाफ हत्या के 16 मामलों में से यह आठवां मामला था, जिसमें फैसला सुनाया गया।

अब नई शुरुआत की तैयारी

  • 19 साल जेल में बिताने के बाद अब कोली एक नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी में है। जेल अधिकारियों के मुताबिक, “वह अब पहले जैसा नहीं रहा। शांत है, अनुशासित है और बाहर की जिंदगी को लेकर सतर्क भी। ऐसा लगता है जैसे वह सबकुछ फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।

निठारी कांड: न्याय और जांच पर सवाल

  • सुरिंदर कोली की रिहाई ने भारत की सबसे सनसनीखेज आपराधिक घटनाओं में से एक को फिर से चर्चा में ला दिया है। एक ओर यह मामला जांच एजेंसियों की लापरवाही की ओर इशारा करता है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठाता है कि न्याय पाने में 19 साल क्यों लगे।

NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

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