धनबाद (DHANBAD): कथा सम्राट प्रेमचंद का 145 वीं जयंती के अवसर पर एक गोष्ठी का आयोजन मनबाद, झरिया कार्यालय में जियाउल रहमान की अध्यक्षता में गुरुवार को की गई।
मौके पर मौजूद लोगों ने मुंशी प्रेमचंद की सोच उनके युग एवं उसकी प्रमुख प्रवृत्तियां प्रेमचंद और किसान जीवन प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना। प्रेमचंद के कथा साहित्य के जारी विमर्श, स्वतंत्रता की अवधारणा तथा उनकी कहानी और प्रमुख उपन्यासों पर विस्तृत चर्चा की गई। कफन, गोदान, मंगलसूत्र, निर्मला तथा उनका आखिरी निबंध “महाजनी सभ्यता” का विश्लेषण वर्तमान समकालीन परिस्थितियों के आधार पर आज भी महाजनी सभ्यता विश्व बैंक, आई एम एफ, विश्व व्यापार संगठन WTO के विकसित रूप में खड़े हैं । आज भी किसान, मजदूर, महिलाएं, छात्र, बेरोजगार सभी पूंजीवादी साम्राज्यवाद के हमले से शोषित पीड़ित हैं इसीलिए प्रेमचंद की रचनाएं वर्तमान सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक परिवेश को उजगार करता है।प्रेमचंद और उनका साहित्य रचनाएं आज भी प्रासंगिक है। गोष्ठी में नारायण चक्रवर्ती, जियाउल रहमान, भगवान दास, सुरेश प्रसाद तथा अन्य साथी उपस्थित थे।
NEWS ANP के लिए झरिया से अरबिंद सिंह बुंदेला की रिपोर्ट

