कभी-कभी प्रकृति अपनी कलाकारी से ऐसा चमत्कार रच देती है, जो क्षण भर का होता है, पर अमर याद बन जाता है। कर्नाटक के कारवार जिले के घने जंगलों में, फोटोग्राफर रवि गौड़ा के कैमरे ने उसी क्षण को कैद किया, दुनिया की सबसे बड़ी तितली मानी जाने वाली “एटलस मॉथ” (Atlas Moth) को। करीब 24 सेंटीमीटर लंबे पंख, लाल-भूरे रंग में उकेरे सांप जैसे पैटर्न और फैलते ही आभास होता है मानो कोई रेशमी बादल धरती पर उतर आया हो। पर यह सौंदर्य जितना अलौकिक है, उतना ही क्षणभंगुर भी, क्योंकि यह जीव न खाता है, न पीता है, न सांसों के विस्तार का लोभ रखता है। इसके पास न मुंह होता है, न पाचन तंत्र। यह बस उन ऊर्जा कणों पर जीता है, जो उसने लार्वा अवस्था में संचित किये थे। बस दो सप्ताह और फिर यह रंगीन पंख प्रकृति में विलीन हो जाते हैं। नर पतंगा संभोग के बाद मर जाता है, जबकि मादा अपने अंडे देने के बाद आखिरी उड़ान भरती है, मानो आसमान को अलविदा कहती हुई कोई अधूरी कविता। “एटलस मॉथ” हमें सिखाता है कि सौंदर्य लंबी उम्र में नहीं, उन क्षणों में बसता है जो दिल को छू जायें। कभी-कभी सबसे छोटी उड़ान भी सबसे बड़ी कहानी बन जाती है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

