DESK:हरिश्चंद्रपुर ब्लॉक-1 के वारी दौलतपुर गांव में रहनेवाले एक आम आदमी सालेक ने अपनी भारतीय पहचान साबित करने के लिये ऐसा कदम उठाया, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। चुनाव आयोग की बार-बार की सुनवाई, एक के बाद एक दस्तावेज की मांग और लगातार उठते सवालों से टूट चुके सालेक ने आखिरकार वह कर दिखाया, जो किसी भी नागरिक की मजबूरी को बयान करता है। पिता के पुराने दस्तावेज होने के बावजूद दादा के कागज न होने पर आपत्ति जताई गई। नामों में कथित अंतर को आधार बनाकर पहचान पर सवाल उठा दिया गया। बस यहीं से सालेक का सब्र टूट गया, वह अपने दादा की कब्र की मिट्टी लेकर सुनवाई केंद्र पहुंचा और साफ शब्दों में DNA टेस्ट की मांग कर दी।
भावुक स्वर में सालेक ने मीडिया से कहा कि हर दिन लंबी लाइनें लगती हैं। गर्भवती महिलाएं, बहनें, बूढ़े—सब परेशान हैं। सब कुछ दिखाने के बाद भी समाधान नहीं मिलता। पिता और दादा के नाम में फर्क बताया जा रहा है। यही वजह है कि मुझे यह कदम उठाना पड़ा। उसकी आवाज में सिर्फ गुस्सा नहीं, बल्कि सिस्टम से हारे हुये आम आदमी की बेबसी झलक रही थी। मामले पर चुनाव आयोग के ERO और सब-डिविजनल ऑफिसर ने कहा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित गाइडलाइन के तहत चल रही है और हर मामले की जांच नियमों के अनुसार की जा रही है। इधर, इस मसले को लेकर राजनीति भी गरमा गई है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

