रांची(RANCHI):झारखंड का शराब घोटाला शायद देश के उन दुर्लभ मामलों में गिना जाएगा, जहाँ घोटाले की जांच करने वाली एजेंसी और उसके अधिकारी खुद जांच के घेरे में आएंगे। आखिर क्या वजह है कि पुख्ता सबूतों के बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ रहा?
ACB ने खुद अपनी जांच में सैकड़ों-हजारों करोड़ के घोटाले की पुष्टि की। मुख्यमंत्री के पूर्व सचिव की गिरफ्तारी हुई, बड़े अधिकारियों के बयान दर्ज हुए। लेकिन आज तक एक भी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। यह देरी ‘प्रक्रिया’ है या ‘प्रोटेक्शन’?
कहा जा रहा है कि उत्पाद विभाग से आधी रात को सबूत मिटा दिए गए। लेकिन घोटालेबाज शायद यह भूल गए कि हम डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक तकनीक के युग में जी रहे हैं। फाइलों को जलाया जा सकता है, पर डिजिटल ट्रेल को पूरी तरह मिटाना नामुमकिन है।
ACB की इस रहस्यमयी सुस्ती पर भविष्य में उच्च स्तरीय जांच एजेंसियां और माननीय अदालतें भी सवाल पूछेंगी। चार्जशीट का रुकना कानून के साथ मजाक है। जांच का गला घोंटने की कोशिश करने वाले अधिकारी भी जवाबदेही से बच नहीं पाएंगे।
मैं आश्वस्त करता हूं कि झारखंड की जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। न्याय की चक्की थोड़ी धीमी जरूर चल रही है, पर पीसती बहुत बारीक है। झारखंड के साथ न्याय होकर रहेगा। थोड़ा धैर्य रखिए, हिसाब सबका होगा!
NEWSANP के लिए रांची से ब्यूरो रिपोर्ट

