छोटे सुधारों से बड़े बदलाव की आहट : समाहरणालय परिसर में व्यवस्था परिवर्तन की सुगबुगाहट…

छोटे सुधारों से बड़े बदलाव की आहट : समाहरणालय परिसर में व्यवस्था परिवर्तन की सुगबुगाहट…

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है।

जामताड़ा(JAMTADA): कवि कुमार विश्वास की इन पंक्तियों की तरह ही व्यवस्था परिवर्तन की असली बेचैनी भी वही समझ सकता है। जो प्रशासन की बारीकियों को महसूस करता हो। बदलाव केवल बड़ी योजनाओं और भारी भरकम घोषणाओं से नहीं आता। बल्कि वह छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण अवयवों को सहेजने से शुरू होता है।
ऐसी ही एक सकारात्मक आहट शुक्रवार को जामताड़ा समाहरणालय परिसर में देखने को मिली। जब जिले के उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आलोक कुमार ने व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, स्वच्छ और कार्यात्मक बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदमों का श्रीगणेश किया।

समाहरणालय परिसर में आज का दृश्य केवल एक औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं था। बल्कि यह प्रशासनिक संस्कृति में सुधार की सोच का प्रतीक बन गया। जिसमें छोटे सुधारों को भी बड़े परिवर्तन की नींव माना गया है।

सभागार से लेकर एनआईसी कार्यालय तक लिया व्यवस्थाओं का जायजा

उपायुक्त आलोक कुमार ने समाहरणालय परिसर स्थित सभागार, एनआईसी कार्यालय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष, उपायुक्त न्यायालय सहित विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दोनों सभागारों में चल रहे सौंदर्यीकरण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि कार्य गुणवत्तापूर्ण, व्यवस्थित एवं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण होना चाहिए।

दरअसल, किसी भी प्रशासनिक भवन का स्वरूप केवल उसकी दीवारों से नहीं। बल्कि उसकी कार्य संस्कृति और वातावरण से तय होता है। सभागार प्रशासनिक निर्णयों का केंद्र होते हैं। इसलिए उनका व्यवस्थित और आधुनिक स्वरूप प्रशासनिक कार्यक्षमता को भी ऊर्जा देता है।

बिखरे तारों से लेकर बिखरी व्यवस्था तक को समेटने की पहल

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त की नजर समाहरणालय परिसर में विभिन्न स्थानों पर फैले अव्यवस्थित विद्युत एवं इंटरनेट तारों पर भी गई। अक्सर ऐसे दृश्य सरकारी परिसरों में सामान्य माना जाता हैं। इन्हीं छोटी लापरवाहियों से अव्यवस्था का बड़ा चेहरा तैयार होता है।

उपायुक्त ने इन अनावश्यक एवं बेतरतीब तारों को हटाकर सुव्यवस्थित करने का निर्देश दिया। यह कदम केवल सौंदर्यीकरण भर नहीं। बल्कि सुरक्षा, कार्यकुशलता और बेहतर प्रशासनिक वातावरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आज के डिजिटल युग में इंटरनेट और विद्युत व्यवस्था प्रशासनिक कार्यों की रीढ़ हैं। ऐसे में उनका व्यवस्थित होना न केवल तकनीकी दृष्टि से आवश्यक है। बल्कि यह प्रशासनिक अनुशासन का भी प्रतीक है।

सरकार की धरकन “एनआईसी कार्यालय ” की अव्यवस्था पर डीसी हुए असहज

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने एनआईसी कार्यालय एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष का भी जायजा लिया। यहां उन्होंने विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी लेने के साथ कार्यरत कर्मियों से बातचीत की और उन्हें दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

इस दौरान कार्यालय परिसर में फैले कचरे एवं अव्यवस्थित रख-रखाव को देखकर उपायुक्त ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि कार्यालय परिसर को स्वच्छ, साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखा जाए।

यह संदेश केवल एक कार्यालय के लिए नहीं था। बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक संकेत था कि अब कार्यशैली में लापरवाही और अव्यवस्था को सामान्य नहीं माना जाएगा।

उपायुक्त न्यायालय को अधिक कार्यात्मक बनाने पर जोर

उपायुक्त ने समाहरणालय स्थित उपायुक्त न्यायालय का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न्यायालय परिसर की साफ-सफाई, व्यवस्थाओं की कार्यशीलता और आमजन की सुविधा से जुड़े पहलुओं पर विमर्श किया। संबंधित अधिकारियों को न्यायालय परिसर को अधिक फंक्शनल एवं व्यवस्थित बनाने हेतु समुचित दिशा-निर्देश भी दिए गए।

प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता केवल निर्णयों से नहीं। बल्कि उस वातावरण से भी तय होती है जहां आम नागरिक अपनी समस्याओं और उम्मीदों के साथ पहुंचते हैं। ऐसे में न्यायालय परिसर की व्यवस्था को बेहतर बनाना प्रशासनिक संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

छोटे कदमों में छिपा बड़े बदलाव का हनक

समाहरणालय परिसर में गुरुवार को जो कुछ दिखाई दिया। वह केवल सफाई, तार हटाने या भवन सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं था। यह उस सोच का परिचायक था जिसमें प्रशासन यह समझता है कि व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत जमीनी स्तर की छोटी कमियों को दूर करने से होती है।

जब प्रशासनिक परिसर स्वच्छ होंगे, व्यवस्थाएं अनुशासित होंगी, कार्यस्थल व्यवस्थित होंगे और जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी, तभी आम जनता तक सुशासन की वास्तविक अनुभूति पहुंचेगी।

कवि कुमार विश्वास की पंक्तियां यहां फिर प्रासंगिक हो उठती हैं—

हिम्मत ए रौशनी बढ़ जाती है,
हम चिरागों की इन हवाओं से।

जामताड़ा समाहरणालय परिसर में शुरू हुई यह पहल भी शायद उसी चिराग की पहली लौ है। जो आने वाले दिनों में व्यापक प्रशासनिक सुधार की रोशनी बन सकती है।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त निरंजन कुमार, प्रभारी नजारत उप समाहर्ता विकेश कुणाल प्रजापति, जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी संतोष कुमार घोष सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

NEWSANP के लिए आर पी सिंह की रिपोर्ट

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