ईरान से जंग में उलझ गया अमेरिका और दुनिया को भी फंसा गया?

ईरान से जंग में उलझ गया अमेरिका और दुनिया को भी फंसा गया?

शिवपूजन सिंह / वरिष्ठ पत्रकार

इतिहास गवाह है और इसके पन्ने इस बात के पुख्ता सबूत है कि जंग नें इंसानों के लिए एक भयंकर त्रासदी ही लेकर आई है. जंग में बस्तियां उजड़ जाती है, परिवार बिखर जाते है, अपनों के खोने का दर्द सताता है , बिना मर्जी के पलायन की पीड़ा झेलनी पड़ती है और इसकी बेरहम यादों के जख्म जिंदगी भर ताज़ा रहती है.
जंग हुक्मारानों की सनक, जिद, फालतू के फितूर और ताकत के नशा की बानगी ही है.

आप इतिहास के पन्नों को पलटियें, तो इसमे खून के छींटे, चीखे, दर्द, अकाल मौतों का बेदर्द सिलसिला ही मिलेगा. जंग नें सुकून कभी नहीं दिया, यह मानव को गहरे दुख -दर्द के सागर में ही धकेलता आया है. जरा पीछे जाइए पहला और दूसरे विश्वयुद्ध को याद कीजिये, हीरोशिमा -नागासाकी शहर पर गिराए परमाणु बम के बाद के मंजर को महसूस कीजिये. आज तक इसकी यादे डराती है.
ज्यादा नहीं मौजूदा समय में चल रहे रूस और यूक्रेन के युद्ध को देखिए और समझिये किस तरह खंडहर एक देश हो गया. पीढ़ियां तबाह हो गईं, जिंदगी एक उलझन में फंस गईं.
अभी ईरान के साथ अमेरिका और इज़राइल के साथ जंग चल रही है. क्या भीषण तबाही का अवलोकन और दर्शन हो रहा है. अभी- अभी काबूल में पाकिस्तान के मिसाईल अटैक से 400 से ज्यादा मरीज काल के गाल में समा गए.

ये जबरन जंग खुद को सिरमौर बनने के सिवा कुछ भी नहीं दर्शता है. हुक्मारानों के अहंकार और शक्ति प्रदर्शन की एक नुमाइश ही है. जिसकी जद में बेवजह दुनिया का आम आवाम फंसकर अपनी जिंदगी को बोझिल बना जाता है.

इधर,जिस धौस और धमकी की हनक अमेरिका ईरान को दिखा रहा था. उसकी हेकड़ी और अकड़ अच्छे से निकल गईं है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का गुमान पीला पड़ गया है. नाटो और उनके सहयोगी देश, ब्रिटेन और फ्रांस नें सीधे तौर पर जंग में उतरने से मना कर दिया.दरअसल, ईरान का पलटवार इतना धातक और धमकेदार होगा अमेरिका को यह अहसास तनीक भी नहीं था.
ईरान नें ह्रर्मूज स्ट्रेट को बंद करने के ऐलान से इसका असर पूरे संसार में है. इस रास्ते से दुनिया के 20% तेल और गैस आती है. भारत भी इस रास्ते ही अपनी ऊर्जा जरूरतों का आयात करता है. बंद होने के हालात पर ही देश में गैस का संकट गहरा गया. लोगों को रसोई में चूल्हे जलाने के लिए गैस की मारामारी और कालाबाजारी के जरिये ऊँची कीमत पर खरीदना पड़ रहा है.
इधर कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देर -सवेर पेट्रोल के दाम भी बढ़ सकते है. सोचिये लड़ाई किसके बीच हो रही है और परेशानी कौन झेल रहा है. लाजमी है कि जंग की काली छाया सबको प्रभावित करती है.

ईरान नें जैसे अपने इरादे और अपनी जंगी तैयारियों को दिखाया. वह अप्रतियाशित और अचरज करने वाला ही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने तो कतई नहीं सोचा था.
सवाल यें है कि अगर युद्ध लम्बा खींचा तो नुकसान ही होना है. बेशुमार दौलत तो स्वाहा होगी ही, साथ ही अमेरिका का कारोबार और शेयर बाजार की सेहत भी हल्की हो जाएगी. लाजमी है कि दुनिया एकबार फिर मंदी की चपेट में आ सकती है. अभी आई टी सेक्टर की हालत को देख के अंदाजा लगाया ज सकता है, ऑटो, बैंकिंग, FMCG, फार्मा सेक्टर भी इससे आहत होंगे.

वो प्रश्न जिससे बचा नहीं ज सकता, वह यह है कि अमेरिका ने पिछले जो जंगे लड़ी, क्या उससे वो जीत सका या पार पा सका?. तो आप जानेंगे कि अमेरिका को कोरियाई युद्ध, वियतनाम, अफगानिस्तान से अपने कदम पीछे खींचने पड़े .जबकि, दशकों तक उसके सैनिक जूझते रहे.
उसकी सारी हसरते जमीदोज हो गईं.सवाल यें है कि क्या वाकई अमेरिका ईरान के साथ इस लड़ाई में जीत जायेगा? और क्या जो मकसद पाले हुए है उसमे कामयाब होगा?.

खैर ये तो समय ही सबकुछ साफ करेगा, लेकिन कड़वा सच यह जरूर है कि जंग अगर लम्बा चला तो फिर इसकी बारूद की गंध और धुंए से दुनिया का दम घुटेगा. अभी देश में गैस का संकट इसकी एक झलक दिखला रहा है.आगे और किसी चिज़ की किल्लत और मंदी की मार का भी सामना करना पड़ सकता है.

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