धनबाद(DHANBAD): पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या के मामले में सोमवार को आरोपी धनजी एवं कुर्बान अली की ओर से उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने बहस कर एक बार फिर चश्मदीद गवाह आदित्य राज की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा किया। आदित्य राज को चश्मदीद गवाह बनाने के लिए साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आदित्य का जख्म प्रतिवेदन इलाज कराए बिना ही केंद्रीय अस्पताल से जारी कर दिया गया। अदालत में प्रदर्श के रूप में चिह्नित दस्तावेजी साक्ष्य का हवाला देते हुए केंद्रीय अस्पताल से जारी बेड टिकट, सेंट्रल हॉस्पिटल के रजिस्टर को प्रस्तुत कर बचाव पक्ष ने बताया कि 21 मार्च 2017 को आदित्य का सेंट्रल हॉस्पिटल ने जख्म प्रतिवेदन दिया गया, जबकि उसी दिन उसी समय पर आदित्य को अस्पताल रजिस्टर में भर्ती दिखाया गया।
पुलिस को अस्पताल से उसी समय आदित्य राज के भर्ती होने की जानकारी दी गई है। बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि जब आदित्य अस्पताल में भर्ती हुए तो फिर उसी समय जख्म प्रतिनिधि कैसे दिया गया। बिना इलाज के ही आदित्य राज का जख्म प्रतिवेदन अस्पताल ने जारी किया है। आदित्य फिर अस्पताल से फरार हो गया। बचाव पक्ष ने कुर्बान अली की ओर से कहा कि पुलिस का अनुसंधान सोनू नामक व्यक्ति के ऊपर चल रहा था और कुर्बान अली की गिरफ्तारी से पूर्व ही 26 जून 2017 को पुलिस उसके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। यह कैसे संभव हो सकता है। पुलिस के अनुसार यूपी एसटीएफ कुर्बान अली को गिरफ्तार किया, परंतु यूपी एसटीएफ से पुलिस ने पूछताछ नहीं की। कुर्बान को कैसे लाया गया, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है। कुर्बान से जो मोबाइल फोन बरामद किया गया है, उससे किसी से बात नहीं हुई है। ऐसा अनुसंधानकर्ता ने अपनी गवाही में स्वीकार किया है। बचाव पक्ष की ओर से आज सभी आरोपियों की ओर से बहस पूरी हो गई। सिर्फ जैनेंद्र कुमार उर्फ पिंटू सिंह की ओर से बहस होनी बाकी है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट
