रांची(RANCHI): रांची से बड़ी राजनीतिक और कानूनी खबर सामने आई है, जहां 2021 में हुए मुख्यमंत्री आवास घेराव मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।
यह मामला उस समय का है जब आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर आजसू पार्टी ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया था। उस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री Hemant Soren के आवास के बाहर भारी प्रदर्शन हुआ था, जिसमें स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
प्रदर्शन के दौरान भीड़ के उग्र होने और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश में पुलिसकर्मियों के घायल होने का आरोप लगा था। इसके बाद लालपुर थाना में केस दर्ज किया गया था, जिसमें आजसू पार्टी के अध्यक्ष Sudesh Mahato, सांसद Chandra Prakash Choudhary और अन्य नेताओं को आरोपी बनाया गया था।
इस मामले में कुल छह नेताओं ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिनमें पूर्व विधायक Lambodar Mahato भी शामिल थे। बाद में सभी को जमानत मिल गई थी।
हाल ही में अदालत ने इस केस में आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान एक बड़ा फैसला सामने आया, जिसमें लंबोदर महतो को आरोपों से राहत दे दी गई, जबकि बाकी पांच नेताओं के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए।
लंबोदर महतो ने अदालत में विधानसभा उपस्थिति रजिस्टर पेश किया था, जिसके आधार पर दावा किया गया कि वह घटना के समय विधानसभा सत्र में मौजूद थे। इसी दस्तावेज को आधार मानकर अदालत ने उन्हें केस से बाहर कर दिया।
हालांकि, इस फैसले के बाद विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शन के दौरान ली गई तस्वीरों में उनकी उपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि केवल उपस्थिति रजिस्टर के आधार पर राहत देना कितना उचित है।
अब इस मामले ने एक बार फिर झारखंड की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने की संभावना है।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

