युवाओं को संवारने वाली स्टेट लाइब्रेरी को सरकारी मदद का है इंतजार.. आखिर कब बदलेगी किस्मत..?

धनबाद(DHANBAD): एक तरफ भारत सरकार की राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन संस्कृति मंत्रालय ने झारखंड के दो पुस्तकालय को चयनित किया है. जिसमें धनबाद का स्टेट लाइब्रेरी भी शामिल है..

वहीं धनबाद की स्टेट लाइब्रेरी को 02करोड़ की लागत से मॉडल लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया जायेगा..

जानकारी के लिए बता दें कि धनबाद राजकीय पुस्तकालय की स्थापना 1953 में की गई थी तकरीबन वूमेन कॉम्पिटेटिव एक्जाम साहित्य करं अफेयर्स के कुल 56000 किताबें मौजूद

अब सवाल है कि धनबाद की स्टेट लाइब्रेरी की मौजूदा हाल क्या है..?

मगर इन सवालों का जवाब ढूंढने से पहले हम बता दें कि पिछले कई कई दशकों से धनबाद की स्टेट लाइब्रेरी प युवाओं की भविष्य संवार रही है। गरीब मेघावी बच्चों के कैरियर में वरदान साबित हो रही है..माता पिता की तरह ही एक अभिभावक की तरह युवक युवतियों की मार्गदर्शन कर रहीं है..ये लाइब्रेरी एक ऐसे शिक्षक के रूप में भूमिका निभा रहीं है..जो एक दोस्त की तरह आपको प्रतियोगिता परीक्षा में पास कराने के लिए पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराती है,…

जरा सोचिए महंगाइ के इस युग में मात्र ₹24 में आप लाइब्रेरी की सदस्यता प्राप्त कर सकते हैं,वाकई किसी सुविधा विहीन गरीब बच्चे के लिए वरदान से कम नहीं…

आज भी कोयलांचल धनबाद के विभिन्न इलाकों से आएं 300 से 400 बच्चे प्रतिदिन लाइब्रेरी में सेल्फ स्टडी करने पहुंचते है..

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने हैं….यहां का शांत वातावरण बच्चो को पढ़ने और सीखने के लिए प्रेरित करता है। बच्चे ग्रुप बनाकर एक दूसरे की मदद करते है..सामान्य ज्ञान बढ़ाने के साथ ग्रुप में दिस्कशन करते है..प्रश्नोत्तर को हल करने के साथ कमजोर छात्रों की मदद भी करते है..

हालांकि इन दिनों धनबाद राज्य पुस्तकालय का नाम बदलकर सोबरन मांझी राजकीय पुस्तकालय रखा गया है ..वहीं नवंबर माह में धनबाद डीसी वरुण रंजन द्वारा राजकीय पुस्तकालय का निरीक्षण किया गया था। जिसके बाद पुस्तकालय में सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे..जैसे वाई-फाई की सुविधा , महिला वॉशरूम ,पानी की सुविधा एवं साफ सफाई को लेकर खास निर्देश भी दिया था…

पर जब NEWS ANP की टीम धनबाद के स्टेट लाइब्रेरी पहुंची तो छात्रों ने अपने समस्याओं से अवगत कराया उन्होंने कहा कि प्रतिदिन सैकड़ो छात्र -छात्राएं पुस्तकालय में पढ़ने आते हैं जिसमें लड़कों की संख्या ज्यादा होती है. जहां पुस्तकालय में बैठने की जगह कम होने की वजह से कुछ छात्रों को नीचे फर्श पर बैठना पड़ता है तो कुछ को वापस घर चले जाना पड़ता है,

पुस्तकालय का फर्श और बाथरूम काफी गंदा रहता है, दुर्भाग्य से डीसी के निर्देश पर शुरू की गई वाई-फाई सेवा भी 10 दिन से बंद पड़ा है.. जिसको लेकर उन्हें ऑनलाइन लेक्चरर्स पढ़ाई से जुड़े मैटेरियल ऑनलाइन नहीं मिल पाती है…

वहीं लड़कियों ने भी बताया कि लाइब्रेरी के बाथरूम बहुत ज्यादा गंदा है , बदबू आती रहती है ..टॉयलेट गेट पर लॉक नहीं होने की वजह से उन्हें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

यहां Upsc,Railway, Banking की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भी 50% ही किताबें मौजूद है ..कुछ बुक उन्हें बाहर से खरीद कर लाकर पढ़ना पड़ता है.

छात्रों ने यह भी कहा कि डीसी वरुण रंजन निरीक्षण के बाद उनके आदेश का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा है .. छात्र छात्राएं इन कम संसाधनों में भी प्रत्येक वर्ष कई प्रतियोगी परीक्षा में पास कर कीर्तिमान बना रहें है..मगर ये गुदड़ी के लाल तो तभी कमाल दिखाएंगे..जब सरकार उनकी जरूरतों को पूरी करें..अब देखना है..भविष्य बनाने वाली इस लाइब्रेरी की किस्मत कब तक बदलती है..

NEWS ANP के लिए धनबाद से नितेश के साथ अंजलि चक्रवर्ती की रिपोर्ट..

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