SNMMCH में हुआ नेत्रदान…

SNMMCH में हुआ नेत्रदान…

धनबाद(DHANBAD): कतरास निवासी रामचंद्र सोनार के निधन के बाद शनिवार को एसएनएमएमसीएच में उनके परिजनों ने नेत्रदान कर समाज के सामने एक अनुकरणीय मिसाल पेश की. इस दान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को आंखों की रोशनी मिल सकेगी. रामचंद्र के बेटे मनोज सोनी ने बताया कि उन्होंने समाजसेवी अंकित राजगढ़िया की प्रेरणा से यह बड़ा निर्णय लिया. मनोज ने कहा कि पिता के नेत्रदान से किसी के जीवन में उजाला आयेगा, यह हमारे लिए गर्व की बात है. समाजसेवी अंकित राजगढ़िया ने कहा कि नेत्रदान जीवन का सबसे अनमोल दान है. नेत्रदान की इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में एसएनएमएमसीएच के सुपरिटेंडेंट डॉ दिनेश गिंदौरिया व डॉ एमके दुबे का विशेष योगदान रहा. बता दें कि अस्पताल में सालों से बंद नेत्रदान बीते दिनों कॉर्निया आने के बाद यह सुविधा शुरू हुआ.

एसएनएमएमसीएच में दो कॉर्निया उपलब्ध, अंधेपन से छुटकारा पा सकते हैं मरीज
शहीद निर्मल महतो मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) के नेत्र रोग विभाग में अंधेपन से ग्रसित मरीजों के लिए सुनहरा अवसर है. विभागाध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल के पास फिलहाल दो कॉर्निया उपलब्ध है. यह कॉर्निया उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकता है, जो कॉर्नियल ब्लाइंडनेस (कॉर्निया संबंधी अंधापन) से जूझ रहे हैं. डॉ कुमार ने बताया कि इस गंभीर समस्या से पीड़ित मरीज सात दिनों के अंदर अस्पताल से संपर्क कर सकते हैं. यदि निर्धारित समय सीमा के अंदर कोई पात्र मरीज सामने नहीं आता है, तो उपलब्ध कॉर्निया को रांची स्थित रिम्स भेज दिया जायेगा.

कॉर्निया प्रत्यारोपण क्यों है जरूरी :
कॉर्निया आंख का पारदर्शी सामने वाला हिस्सा होता है, जो प्रकाश को आंख के भीतर प्रवेश करने और दृष्टि बनाने में मदद करता है. चोट, संक्रमण, जन्मजात बीमारियां या किसी अन्य वजह से कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो जाने पर मरीज की आंखों को रोशनी चली जाती है. कॉर्निया ट्रांसप्लांट इस समस्या का एकमात्र प्रभावी इलाज है. इसमें दान किये गये स्वस्थ कॉर्निया को मरीज की आंख में लगाया जाता है. सफल ऑपरेशन के बाद मरीज सामान्य दृष्टि वापस पा सकता है.

नेत्रदान ही कॉर्निया ब्लाइंडनेस का समाधान :
डॉ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि अन्य अंगों की तरह कॉर्निया का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है. केवल नेत्रदान ही कॉर्निया ब्लाइंडनेस का समाधान है. जब कोई व्यक्ति मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करता है, तभी ऐसे मरीजों को नया जीवन मिलता है.

मरीजों से अपील :
एसएनएमएमसीएच प्रबंधन ने मरीजों और उनके परिजनों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति या परिवार कॉर्निया प्रत्यारोपण के योग्य मरीज को जानता है, तो अगले सात दिनों में अस्पताल के नेत्र रोग विभाग से संपर्क करें. यह केवल एक मेडिकल सुविधा नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बदलने का मौका है. डॉ कुमार ने बताया कि समय पर सही मरीज तक कॉर्निया पहुंचना बेहद जरूरी है. यदि कोई मरीज समय पर संपर्क करेगा तो उसकी जिंदगी अंधकार से प्रकाश की ओर लौट सकती है.

NEWSANP के लिए धनबाद से ब्यूरो रिपोर्ट

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