रांची (RANCHI ):– झारखण्ड विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने बिगुल फूंक दिया है. राज्य में 13 और 20 नवंबर को चुनाव होंगे और रिजल्ट 23 को आ जायगा. यानि डेढ़ महीने में सब साफ हो जायेगा की किसकी सरकार झारखण्ड में बनेगी. हालांकि, सत्ता के लिए लड़ाई, कशमकश और आरोप -प्रत्यारोप का सिलसिला तेज है. अब अचार संहिता भी लागू हो गई है, ऐसे में अब चुनाव आयोग की बंदिशे यानि निगरानी सख्त होगी और पार्टियों को भी एक दायरे में ही रहना होगा. हालांकि, प्रचार भी तेज़ होगा और जीत के लिए जंग इंडिया और एनडीए में परवान चढ़ेगी.अभी अनबन, तीखे तेवर और एक दूसरे पर तोहमते भाजपा और जेएमएम में कुछ ज्यादा हो रही है .
अभी चर्चा और घमासान महिलाओं को मासिक मिलने वाली राशि को लेकर कुछ ज्यादा बढ़ गया है.हेमंत सरकार चुनाव से पहले ही माईयां सम्मान योजना लाई, जो हर महीने महिलाओं को 1000 रूपये दे रही है. तो वही भाजपा ने गोगो दीदी योजना लेकर आई है, जिसमे ये बताया गया कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो गोगो दीदी योजना के तहत मासिक 2100 रूपये महिलाओं को दी जाएगी. भाजपा ने इसे मईयां सम्मान के काट के तौर पर लाई थी. इसके लिए फॉर्म भी भराये जा रहें हैं . भाजपा के इस ऐलान के बाद हेमंत सोरेन की चिंता बढ़ गई, उन्हें लगने लगा की चुनाव में उनका दाव कहीं उल्टा न पड़ जाय. कहीं भाजपा की गोगो दीदी योजना मईयां सम्मान को पछाड़ न दे.बीजेपी की तरफ से महिलाओं को फॉर्म भराए जाने पर, उन्होंने नाराजगी, आपत्ति और विरोध भी दर्ज कराया . आखिरकार उन्होंने इसके जवाब देने के लिए अपनी आख़री कैबिनेट बैठक में मास्टर स्ट्रोक ही खेल दिया. उन्होंने दिसंबर से मईयां सम्मान की राशि 2500 रूपये करने का ऐलान कर दिया. उनके इस घोषणा से राज्य की महिलाएं तो ख़ुश है. मुफ्त में मिलने वाले ये पैसा लाजमी है कि मददगार होगी. लेकिन, इससे राज्य सरकार पर 9000 करोड़ का सालाना बोझ भी बढेगा.जो राज्य सरकार के लिए एक चुनौती की तरह होगी.हेमंत सोरेन इस राशि या कहे इस सौगात को महिला सशक्तिकरन से जोड़ रहें है.
लेकिन, असली खेल तो यही है कि कहीं सत्ता उनके हाथ से नहीं फ़िसले.क्योंकि एकबार कुर्सी हाथ से निकल गई तो फिर उनके लिए गड़बड़ हो जायेगी और राज्य की बागडोर ही हाथ से निकल जाएगी, जिसे वो किसी भी सूरत में जाने नहीं देना चाहते. उनका कुर्सी प्रेम कथित जमीन घोटाले के आरोप में जेल से छूटने के बाद भी दिखा था. जब चंपाई सोरेन को हटाकर फिर मुख्यमंत्री बन गए थे. सवाल तो यही है और लोग चर्चा भी कर रहें है कि सीएम हेमंत सोरेन को अभी इसकी इतनी फिक्र क्यों सताने लगी ?
महिलाओं को ये सम्मान राशि देने का ऐलान 2019 में सत्ता हासिल करने के बाद ही करना चाहिए था.इधर जेएमएम ने इसकी शुरुआत की तो भाजपा ने भी गोगो दीदी के तहत 2100 देने का ऐलान कर दिया. इस रस्साकशी में ही मईयां सम्मान की मासिक राशि 2500 रूपये की गई.अगर देखा जाए तो मुफ्त बिजली, पानी और पैसे देने का एक ट्रेंड राजनीतिक दलों के बीच चल गया है. दिल्ली चुनाव में आप पार्टी ने इसकी जोर शोर से शुरुआत की थी, इसके बाद तो इस नक़्शे कदम पर तक़रीबन सब पार्टियां चलते नजर आ रही है.सवाल ये है कि क्या अब वोट बटोरने के लिए ही ये सब किया जा रहा है. देश और राज्य के मुद्दे और मसले पीछे छूट रहें है?. क्या रोजी -रोजगार की बाते और विकास के मुद्दे जोर नहीं पकड़ेगी?. क्या सरकारों के पिछले काम काज को जनता इस छोटी सी सौगात मिलने पर भूल जाएगी. सवाल ये भी है कि चुनाव के मौसम में इन योजनाओं का ऐलान करना कहां तक सही हैं?.
मुद्दे, मसले और प्रश्न कई हैं, जो देश और राज्य की जनता खूब समझती हैं. आम आवाम भी इन सियासी दलों की चाल और सोच को भी जानती हैं. सच्चाई तो ये भी है कि आज के इस महंगाई के ज़माने में ये सम्मान की राशि ऊंट के मुंह में जीरे की तरह है.फिलहाल, झारखण्ड चुनाव में यही देखना दिलचस्प होगा की प्रदेश की महिला मतदाताए आखिर किसे अपना वोट देती. क्या वो जेएमएम की मईयां सम्मान योजना से ख़ुश होगी या फिर भाजपा की गोगो दीदी पर उनका ऐतबार होगा.अगर नजर दौड़ाए तो राजनीतिक दलों के बीच महिला वोटर्स को अपने पक्ष में करने की एक होड़ और हड़बड़ी सी मची हैं. खैर सरकार किसी की भी बने लेकिन, चुनाव से पहले तो ये तय हो गया हैं कि हर महीने झारखण्ड की महिला मतदाताओं के बैंक एकाउंट में पैसे तो जरूर आएंगे.
NEWS ANP के लिए रांची से शिव पूजन सिंह की रिपोर्ट

