NAVRATRI 2024 DAY 9:आज मां दुर्गा का नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री है.. जाने पूजा विधि,भोग और कथा…

NAVRATRI 2024 DAY 9:आज मां दुर्गा का नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री है.. जाने पूजा विधि,भोग और कथा…

धनबाद(DHANBAD): नवरात्र में नौंवे दिन की अधिष्ठात्री देवी हैं मां सिद्धिदात्री. इनकी उपासना से हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त की जाती है. मार्कण्डेय पुराण में आठ और ब्रह्मवैवर्त पुराण में अठारह सिद्धियां बताई गई हैं. जोकि इस प्रकार है-अणिमा, महिमा, गरिमा, लधिमा प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व.

मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व
नवरात्रि के नौ दिनों तक उपवास और पूजा-अर्चना करके, भक्त मां दुर्गा की कृपा पाते हैं और मनचाहा फल प्राप्त करते हैं। साथ ही, घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व – ये आठ सिद्धियां हैं जिन्हें देवी-देवता, गंधर्व, ऋषि और असुर भी माता सिद्धिदात्री की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ करके प्राप्त कर सकते हैं। माता सिद्धिदात्री की पूजा करने से सिद्धियों की प्राप्ति के साथ अंत में मनुष्य जीवन-मृत्यु के चक्र से निकलकर मोक्ष को प्राप्त होता है।

पूजा विधि
नवरात्रि की नवमी तिथि की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां को सफेद रंग पसंद है। मां सिद्धिदात्री को सफेद कमल का फूल अर्पित करना सबसे शुभ माना जाता है।
मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें। मां को रोली कुमकुम लगाएं।
मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें। माता सिद्धिदात्री को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के पुष्प और नौ प्रकार के ही फल अर्पित करने चाहिए।
मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा बहुत प्रिय है। मान्यता है कि मां को इन चीजों का भोग लगाने से वह बहुत प्रसन्न होती हैं।
माता सिद्धिदात्री का अधिक से अधिक ध्यान करें। फिर अंत में माता रानी की आरती करें।
यदि आपने नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन की मनौती रखा है, देवी माता की पूजा के बाद विधि-विधान से औ निष्ठापूर्वक कन्या पूजन करें, तभी पूजा संपन्न मानी जाएगी।

मां सिद्धिदात्री का प्रिय भोग
मां दुर्गा का नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री है। नवे दिन की पूजा में माता सिद्धिदात्री को पुरी, चने और हलवे का भोग लगाया जाता है और यह भोग कन्याओं को भी दिया जाता है। इस दिन कन्या पूजन किया जाता है, इसे करने से ही मां के नौ दिनों की पूजा पूरी होती है।

इसके साथ ही आप चाहें तो माता रानी को सूजी या गेहूं के हलवा का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा, चावल, दूध, चीनी एवं केसर युक्त खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। मां सिद्धिदात्री को मीठे पुलाव और लाप्सी का भोग लगाने से घर-परिवार के रिश्तों में भी मिठास जन्म लेती है और रिश्ते मजबूत होते हैं

सिद्धिदात्री माता की कथा
जब महिषासुर दैत्य के अत्याचारों से तीनों लोकों में आतंक का राज हो गया। हर तरफ अराजकता और निराशा फैल गई थी। स्वर्ग में देवता और धरती पर ऋषि-मुनि और मानव त्राहिमाम कर उठे थे। तब एक समय काफी दुखी और परेशान होकर देवतागण, सप्तर्षि और ऋषि-मुनि भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे। सभी ने अपनी व्यथा उन्हें सुनाई। भगवान शिव और भगवान विष्णु ने सभी देवों और ऋषियों से देवी आदिशक्ति का आह्वान करने के लिए कहा। तब वहां मौजूद सभी देवतागण और सप्तर्षियों से एक महातेज उत्पन्न हुआ।

फिर उसी तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने भी सभी आठों सिद्धियों को प्राप्त करने लिए मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या थी। मां सिद्धिदात्री की कृपा से भगवान शिव को न केवल वे आठों सिद्धियां मिली बल्कि उनका आधा शरीर देवी का हो गया था। इस रूप में महादेव अर्धनारीश्वर कहलाए। मां दुर्गा के नौ रूपों में यह रूप परम शक्तिशाली माना गया है।

मां सिद्धिदात्री का उपासना मंत्र
मां सिद्धिदात्री स्तुति: या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

पूजा मंत्र: सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि, सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।

स्वयं सिद्ध बीज मंत्र: ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम

मां सिद्धिदात्री आरती
जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता। तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि। तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम। जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है। तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो। तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।

तू सब काज उसके करती है पूरे। कभी काम उसके रहे ना अधूरे।

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया। रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली। जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा। महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता। भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।

NEWSANP के लिए धनबाद से रागिनी पांडेय की रिपोर्ट

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