IIT (ISM) धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह का भव्य शुभारंभ…

IIT (ISM) धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह का भव्य शुभारंभ…


प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने कहा—“आईआईटी(आईएसएम) राष्ट्र निर्माण का मज़बूत स्तंभ”

धनबाद(DHANBAD):आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में बुधवार को शताब्दी स्थापना सप्ताह की शुरुआत अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक माहौल में हुई। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, राजनयिकों, उद्योग प्रतिनिधियों, पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। संस्थान की 100 साल की गौरवपूर्ण यात्रा को समर्पित इस अवसर ने पूरे अकादमिक परिसर को उत्साह से भर दिया।

शताब्दी समारोह का आरंभ वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने आईआईटी (आईएसएम) को एक सदी की उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल भारत के तकनीकी इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय रहा है, बल्कि आने वाले दशकों में यह क्रिटिकल मिनरल्स, उन्नत प्रौद्योगिकी और नवाचार-आधारित विकास का अगुआ बनेगा।

उन्होंने कहा कि भारत में टेक्नोलॉजी-ड्रिवन गवर्नेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस मिशन, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति ने देश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दी है। आईआईटी (आईएसएम) को इस परिवर्तन यात्रा में प्रमुख भूमिका निभानी चाहिए।

डीन कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस प्रो. रजनी सिंह की एंकरिंग की सराहना

कार्यक्रम के संचालन का दायित्व निभा रहीं प्रो. रजनी सिंह की एंकरिंग और कार्यक्रम प्रबंधन की मुख्य अतिथि सहित सभी गणमान्यों ने विशेष प्रशंसा की।

निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा बोले—“शताब्दी उत्सव हमारे लिए नए संकल्पों का समय”

आईआईटी (आईएसएम) के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने स्वागत भाषण में बताया कि संस्थान आने वाले वर्षों में माइनिंग 4.0, डिजिटल टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी, एआई, क्रिटिकल मिनरल रिसर्च और इंडस्ट्रियल इन्नोवेशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नेतृत्व स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि शताब्दी केवल समारोह का समय नहीं बल्कि संस्थान को नई वैश्विक ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प है।

इस अवसर पर एमएनआईटी जयपुर के निदेशक प्रो. एन. पी. पाढ़ी का सम्मान किया गया। उन्होंने कहा कि आईआईटी (आईएसएम) की 100 वर्षीय यात्रा देश के वैज्ञानिक विकास की एक प्रेरक कथा है। उन्होंने रिसर्च इनफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन कल्चर और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों की भी सराहना की।

ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर एंड्रयू एलेक्ज़ेंडर फ्लेमिंग ने अपने संबोधन में कहा कि यूके-इंडिया विज़न 2035 के तहत तकनीकी सहयोग अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। उन्होंने TEXMiN और यूके-आधारित GEOTECH के साथ शुरू हुई ड्रिल कोर डिजिटाइजेशन लैब को नई संभावनाओं का महत्वपूर्ण कदम बताया।
इसके साथ ही ज्ञान-विज्ञान प्रांगण का शुभारंभ किया गया, जहां एआई-आधारित इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस, डिजिटल ट्विन, रोबोटिक्स, मेटावर्स-बेस्ड माइनिंग मॉडल, क्लीन एनर्जी इनोवेशन और भारतीय ज्ञान प्रणाली से जुड़े प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र बने।

कार्यक्रम के अंत में उपनिदेशक प्रो. धीरज कुमार ने सभी अतिथियों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों, पूर्व छात्रों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

आईआईटी (आईएसएम) का यह शताब्दी पर्व साबित करता है कि संस्थान न केवल अपने गौरवशाली इतिहास का संवाहक है, बल्कि विकसित भारत @2047 के तकनीकी नेतृत्व को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

NEWSANP के लिए धनबाद से कुंवर अभिषेक सिंह की रिपोर्ट

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