यहाँ रंग और ग़ुलाल से नही पानी से मनाई जाती है होली,होली से पहले की जाती है प्राकुर्तिक पूजा

आसनसोल(ASANSOL)होली रंग गुलालों का सबसे बड़ा त्योहार है, जो भारत ही नही बल्कि विदेशों तक खूब प्रसिद्ध है, यही कारण है की होली के रंग मे रंगने के लिए विदेशों से लोग भारत मे पहुँचते हैं और इस त्योहार को बहंसी ख़ुशी व नाच गाने के साथ मनाते हैं, भारत मे कुछ ऐसे भी कई इलाके हैं जो अलग -अलग तरीके से होली खेलने को लेकर काफी प्रसिद्ध हैं, इन्ही इलाकों मे से कुछ ऐसे भी इलाके हैं.

जो होली के इस रंगारंग उत्सव मे बहोत ही खास तौर पर जाने और पहचाने जाते हैं, जिसमे से पश्चिम बंगाल के आसनसोल मे स्थित रिभर साइड का माझी पाड़ा इलाका है जो होली के रंगारंग महोत्सव मे अपनी अलग ही पहचान रखता है, वह इस लिए की इस इलाके के रहने वाले लोग रंग या ग़ुलाल से नही बल्कि पानी से होली खेलते हैं, देश मे होली की शुरुआत भले ही होलिका दहन के बाद होती होगी पर पानी से होली खेलने वाला यह आदिवासी समाज होली के ठीक एक दिन पहले महुआ और साल के पेड़ की पूजा कर्ता है.

आदिवासी समाज के लोग अपने पारम्परिक तौर पर ढोल और नगाड़े के थाप पर जमकर नाचते और गाते हैं, अपने पारम्परिक हथियारों की पूजा भी करते हैं जिसके अगले दिन वह प्राकुर्तिक नियम को पालन करते हुए पानी से होली खेलते हैं और एक दूसरे को भिगोते भी हैं, उनका मानना है की पहले ना तो रंग था और ना ही गुलाला पहले लोग पानी से ही होली खेलते थे, उनका यह भी मानना है की उनकी समाज के पूर्वजों के अनुसार वह हर वर्ष होली के मौके पर प्राकुर्तिक की पूजा करते हैं उनकी इस पूजा मे जल, जंगल और जमीन की बहोत बड़ी महत्व होती है.

जिसको उनका समाज पूजा याचना कर्ता है और हर वर्ष कैमिकल युक्त होली मनाते हैं यहीं नही उनका यह भी मानना है की वह अपने इस होली मे रिश्तों का बहोत ही खाश ख्याल रखते हैं और वह उन्ही के साथ होली खेलते हैं जो रिश्ते मे उनका हमजोली हो या फिर देवर भाभी हो या साली दामाद का कोई रिश्ता नाता हो, इसके अलावा वह बाहरी लोगों के साथ होली नही खेलते

NEWS ANP के लिए आसनसोल से अमरदेव की रिपोर्ट…

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